दाता तेरे सुमिरन का वरदान जो मिल जाये।

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दाता तेरे सुमिरन का वरदान जो मिल जाये।

दाता तेरे सुमिरन का
वरदान जो मिल जाये।
मुरझाई कली दिल की
एक आन में खिल जाये।

सुनते हैं तेरी रहमत
दिन रात बरसती है।
एक बूंद जो मिल जाये,
तकदीर बदल जाये।

यह मन बड़ा चंचल है,
चिन्तन में नहीं लगता।
जितना इसे समझाऊँ,
उतना ही मचल जाए।

हे नाथ मेरे दिल की
बस इतनी तमन्ना है।
पापों से बचा लेना,
पाँव न फिसल जाए।

देवत्व के फूलों से,
दामन को मेरे भर दो।
जीवन ये सुगन्धित हो,
दुर्गन्ध निकल जाए।

ऐ मानव तू. दिल से
प्रभु नाम का सिमरन कर।
दोषों भरे जीवन का
काँटा ही बदल जाए।