भजन 3 (तर्ज-नगरी-नगरी द्वारे-द्वारे……)
सदा फूलता फलता भगवन्,
यह याजक-परिवार रहे।
रहे प्यार जो किसी से इनका,
सदा आपसे प्यार रहे॥
मिथ्या कर अभिमान कभी न,
जीवन का अपमान करें।
देवजनों की सेवा करके,
वेदामृत का पान करें।
प्रभु आपकी आज्ञा पालन,
करता हर नर-नार रहे……
मिले सम्पदा जो भी इनको,
उसको मानें आपकी।
घड़ी न आने पावे इन पै,
कोई भी सन्ताप की ॥
यही कामना प्रभु आपसे,
कर हम बारम्बार रहे…..
बने रहें सन्तोषी सारे,
जीवन के हर काल में।
हाल-चाल हो कैसा इनका,
रहें मस्त हर हाल में।
ताकि ‘देश’ बसाया इनका,
सुखदाई संसार रहे…….
दुनियादारी रहे चमकती,
धर्म निभाने वाले हों।
सेवा के सांचे में सबने,
जीवन अपने ढाले हों।
बच्चा-बच्चा परिवार का,
बनकर श्रवणकुमार रहे










