शाम सवेरे हिल मिल प्यारे गीत प्रभु के गावो रे।

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शाम सवेरे हिल मिल प्यारे गीत प्रभु के गावो रे।

शाम सवेरे हिल मिल
प्यारे गीत प्रभु के गावो रे।
यह रंग कभी न घुलने पाए,
ऐसा रंग चढ़ाओ रे ।।

लिपट न जाए जीवन हीरा,
विषय वासना धूल में।
फूलों की आशा में,
आंचल उलझ न जाए शूल में ।।

जग की भूल भूलैय्यों को लख,
भूल उसे मत जाओ रे।
शाम सवेरे……

जीवन सेज नहीं फूलों की,
यहाँ काटों की भरमार है।
आधि व्याधि के विषय जाल में,
लिपट रहा संसार है।।
प्यारे प्रभु से नेह लगाकर,
तन की तपश बुझाओं रे।
शाम सवेरे……..

मानव हो कुछ मनन करो,
इस दुनियाँ में क्यों आए हो।
शुभ कर्मों की बेल खींच कर
आनन्द के फल खाओ रे ।।
शाम सवेरे……..

इस उमर दी डोर ने टुट जाना
गुड्डी सदा नहीं असमान ते चढ़ी
रहिणी लक्छा बूटियां दवा दारू कर लै.
नब्ज हथ्थ हकीम दे फड़ी रहिणी।
चार रोज तां सड़क ते सैर करलै,
बग्गी विच तबेलियां खड़ी रहिणी।
जिस दौलत दा बन्देया मान करनै
दौलत विच जमीन दे पई रहिणी ।।