हे जगतपिता, हे जगतप्रभु

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हे जगतपिता, हे जगतप्रभु

हे जगतपिता, हे जगतप्रभु
मुझे अपने नाम का दान दो।
तुझे अपने मन में देख लूं
वह ज्ञान दो वह ध्यान दो ।।

मेरे मन में तेरा रंग हो,
मेरी ज्ञान गंग तरंग हो।
मेरी काम क्रोध से जंग हो,
मुझे लोभ मोह से अमान दो।।

प्रभु तेरी वाणी पढ़ा करूं,
तेरा ही नाम जपा करूं।
तेरा साम गान सुना करूं,
यही सोच दो यही घ्यान दो ।।

प्रभु तेरी भक्ति का बल मिले,
मुझे धैर्य शक्ति प्रबल मिले।
जो मिले विचार अटल मिले,
मुझे ऐसी ऊँची उड़ान दो ।।

मेरा सरल शुद्ध व्यवहार हो,
मुझे वैर भाव से आर हो।
मेरा हर किसी से प्यार हो,
मुझे ऐसा प्रेम महान दो।।

मैं शहीद मन को मिटा सकूं,
मैं किसी के काम भी आ सकें,
मैं किसी को अपना बना सकूं,
मुझे ऐसी मधुर जबान दो ।।