कुछ काम करके जाना

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कुछ काम करके जाना

कुछ काम करके जाना
दुनिया से जाने वाले।
जाते हैं रोज लाखों
बेकार खाने वालें ।।

चौरासी लाख खोये
हर जन्म मरण रोये।
अब व्यर्थ मत गंवाना
दिन चार जीने बाले ।।

हिंसा, असत्य, चोरी कर
करके माया जोरी।
क्या साथ ले चलेगा
सब छोड़ जाने वाले ।।

जोरू जमीन जर से
करता है क्या मोहब्बत।
सब छोड़ने पड़ेंगे नही
साथ जाने वाले ।।

कीजिये सदा भलाई
मतकर कभी बुराई।
नेकी बदी रहेगी
दुनियां से जाने वाले ।।

जन्मा है जो भी मित्रों,
मरना जरूर होगा।
अब बेखबर न रहना
परलोक जाने वाले ।।

दुःखों से अगर चोट खाई न होती।
जो गम की घटा सिरप छाई न होती ।।
जो सुख चैन मिलता सुदामा को घर में।
तो फिर याद मोहन की आई न होती ।