उलक्ष मत दिल बहारों में

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उलक्ष मत दिल बहारों में

उलझ मत दिल बहारों में
बहारों का भरोसा क्या
सहारे टूट जाते है,
सहारों का भरोसा क्या।

तमन्नायें जो तेरी है
फुहारें है ये सावन की।
फुहारें सूख जाती है
फुहारों का भरोसा क्या ।।१।।

दिलासे जो जहाँ के है,
सभी रंगी बहारें हैं
बहारें रूठ जाती है
बहारों का भरोसा क्या ।।२।।

तू सम्बल नाम का लेकर,
किनारों से किनारा कर ।
किनारे टूट जाते हैं
किनारों का भरोसा क्या ।।३।।

अगर विश्वास करना है
तो कर दुनियां के मालिक पर ।
धनी, अभिमानी, लोभी,
दुनियादारों का भरोसा क्या ।।४।।

तू अपनी अक्लमंदी पर,
विचारों पर न इतराना जो
लहरों की तरह चंचल,
विचारों का भरोसा क्या ।।५।।

परम प्रभु की शरण लेकर
विकारों से सजग रहना
कहां कब मन बिगड़ जाये,
विकारों का भरोसा क्या ।।६ ।।

काली मूंछ नवयुवक,
तुझको करती संकेत अरे।
काला मुख अब होने के दिन आए हैं
टुक चेत अरे।
सीख दे रहे वृद्ध केश
ये तेरे शिर के श्वेत अरे।
कफन ओढ़ने से पहले,
करले प्रभु से हेत अरे ।।