वेद पढ़ा जाए और हवन किया जाय।
वेद पढ़ा जाए और
हवन किया जाय।
ऐसे परिवार को ही
स्वर्ग कहा जाए ।।
1- सत्य रग रग में जिनके
रमा हो खुश रहता है
उनसे विधाता प्रेम
सीने में जिनके नहीं है
उनको ईश्वर नजर नहीं
आता कुछ सुहाता नही
सत्संग भाता नहीं,
जीवन पशुओं से बदतर बिताये
2-कर्म नेकी के जो कर गयें हैं
विश्व में नाम उनका अमर है
उनके जीवन की ज्योति से अनगिन
भूले पथिकों ने पाई डगर है
धर्म छोड़ा नहीं नियम तोड़ा नही जाते
उनके सदा गीत गाये
3-सबके घट घट रमा
ईश प्यारा सारा संसार है
उसका पसारा स्वयं स्वार्थ में न
फंस के जो प्राणी दिल दुःखाये नही
जो किसी का स्वप्न में भी
कभी दोष आते नही ‘राघव’
मानव वही कहलाए
4-विचार लो अमर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी।
मरो परन्तु यों मरो, कि याद जो करें सभी।।
अनित्य देह के लिये, अनादि जीव क्यो डरे?
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के जिए मरे।।










