वासना को त्याग मन जब आयेगा
वासना को त्याग मन जब आयेगा ।
साधना आनन्द तभी तू पायेगा ।।
१- ये दुनिया आनी जानी,
जैसे वर्षा का पानी।
प्रभु अमृत का रस पीले,
विषयों से करले ग्लानि।
मोह माया को छोड़ जब तू आयेगा।
साधना…………
२- तन मानव का है मंदिर,
प्रभु रहते इसके अंदर।
यह देवों की है नगरी,
यह मुक्ति का है घर।
भीतर जायेगा, सच्चे प्रभु के
दर्शन तभी तू पायेगा।
वासना……..
३- तुझे कुछ न यहां से मिलेगा,
तुझे लगा हुआ है भुलेखा।
भगवान के घर में होगा,
तेरे पाप पुण्य का लेखा।
जब प्रभु पूछेंगे
हिसाब क्या बतलायेगा।
कोई न तेरा साथी साथ निभायेगा ।।
४- तूने लाख चौरासी पाई,
तूने की न कोई कमाई।
उठ ओ३म् नाम तू भजले,
होगा बड़ी सहाई।
सत्संग जावेगा,
सच्चे प्रभु के दर्शन तभी तू पायेगा ।।
५- आने का साक्षी जाना,
फिर जाने से क्या घबराना।
जब प्राण जायेंगे छूट फिर पछतायेगा।
कोई न तेरा साथी साथ निभायेगा ।।
एक एक क्षण अनमोल है,
इसमें जरा न झूठ।
एक क्षण की देरी हुई,
ट्रेन जायेगी छूट ।।










