राखी का त्यौहार है (श्रावणी (रक्षा बन्धन) पर्व में गाने योग्य गीत)
राखी का त्यौहार है,
भाई-बहिन का प्यार है।
चारों तरफ हरियाली छाई,
आ रही अजब बहार है।।
रंग-बिरंगी राखी सुन्दर,
शोभा लगे कलाई में।
रक्षा बन्धन स्वर्ण सलौना,
हर्ष बहिन व भाई में।।
बहे प्रेम की धार है,
खुशियों की बौछार है।
सखी सहेली झूलें झूला,
गाती गीत मल्हार है।।१।।
दादुर, मोर, पपीहा, कोयल,
मीठा गान सुनाते हैं।
लख धन की घनघोर
सभी पक्षीगण मन हर्षाते है।।
मन में खुशी अपार है,
करें परस्पर प्यार है।
नन्हीं-नन्हीं बूंद पड़े,
और ठण्डी चले बहार है।।२।।
यह ब्राह्मण त्यौहार श्रावणी,
सबके मन को भाया है।
वेद प्रवचन भजन कीर्तन,
जग में नाद बजाया है।
तबला और सितार है,
वीणा और गिटार है।
यज्ञादि शुभ श्रेष्ठ कर्म,
ये वेदों के अनुसार है।।३।।
वेद ईश्वरीय ज्ञान,
वेद का पढ़ना और पढ़ाना है।
वैदिक विचार व्यवहार नेक
, छल घृणा द्वेष मिटाना है।
शुद्ध पवित्र विचार है,
ऋषि की जय-जयकार है।।४।।
जीना तो उसी का,
जिसने ये राज जाना।
है काम आदमी का,
औरों के काम आना।।










