जन्म-जन्म का दुःखिया प्राणी
जन्म-जन्म का दुःखिया प्राणी,
आया शरण तिहारी।
कदम कदम पर घोर मुसीबत,
सिर पै विपदा भारी।।
उठी है चारों ओर से आंधी,
बुझे न दीपक मेरा
मेरे जीवन की कुटिया में,
तेज हवा से इसे बचाकर,
छाये न कभी अंधेरा करना
तुम रखवारी।।१।।
जन्म………
ध्रुव सी मुझको भक्ति देना,
अभिमन्यु सी शक्ति देना।
वीर करण सा मुझे बनाना,
दुनियां में बलकारी।।२।।
जन्म ………
मेरे सारे कष्ट हरना,
शरणागत की रक्षा करना।
तुझ बिन मेरा इस दुनियां में,
कोई नहीं हितकारी।। ३ ।।
जन्म……….
जिधर देखता हूँ, खुदा ही खुदा है।
खुदा से नहीं चीज़ कोई जुदा है।।










