हे दयामय आपका हमको सदा आधार हो।

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हे दयामय आपका हमको सदा आधार हो।

हे दयामय आपका
हमको सदा आधार हो।
आपके भक्तों से ही
भरपूर यह परिवार हो ।

छोड़ देवें, काम को और
क्रोध को मद-मोह को।
शुद्ध और निर्मल हमारा
सर्वदा आचार हो ।

प्रेम से मिल-मिल के
सारे गीत गायें आपके।
दिल में बहता आपका ही
प्रेम-पारावार हो ॥

जय पिता, जय-जय पिता,
हम जय तुम्हारी गा रहे।
रात-दिन घर में हमारे
आपकी जयकार हो ।

पास अपने हो न धन तो
उसकी कुछ परवाह नहीं।
आपकी भक्ति से ही
धनवान यह परिवार हो ।

– प्रेम से मिलने का नाम सम्मेलन होता है और परिचय प्रेम का प्रवर्तक होता है। – आचार्य चन्द्रशेखर