व्याकरण महाविद्यालय का प्रारम्भ,दर्शन योग धाम

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दर्शन योग धाम द्वारा संचालित
व्याकरण महाविद्यालय का प्रारम्भ
(आर्ष पाणिनीय व्याकरण तथा
ऋषिकृत ग्रन्थों के अध्ययन का अवसर)

अनन्तपारं किल शब्दशास्त्रं स्वल्पं तथायुर्बहवश्च विघ्नाः ।
सारं ततो ग्राह्यमपास्य फल्गु हंसैर्यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात् ॥

योगादेव केवल्यम्
लोकोक्ति है कि शब्द शास्त्र की कोई सीमा नहीं क्योंकि विषयों का कोई अन्त नहीं। पुनरपि वैदिक जगत् में “सर्वं विज्ञातं भवति” का सिद्धान्त सर्वसाधारण में प्रचलित है। वस्तुतः ऋषियों ने क्या हेय, क्या उपादेय, कितना ग्राह्य कितना त्याज्य है, इन सबका निर्धारण कर दिया है। सम्पूर्ण धर्म-अधर्म, कर्त्तव्य-अकर्त्तव्य, उचित-अनुचित का सुनियम कर रखा है और इनका आधार है प्रमाण । प्रमाणों से ही समस्त तत्त्वों का निर्धारण होता है ।
प्रमाणों में एक प्रमाण है शब्द प्रमाण अर्थात् वेद । इस वेद के अर्थ को भी जानने का साधन है अङ्ग और उपांग । इन दोनों साधनों से ही समस्त तत्त्वों का यथार्थ परिज्ञान संभव होता है ।


महानुभावो !
आज संसार वेद के इन रहस्यों से वंचित होता जा रहा है इस का कारण है वेद के पठन पाठन की उपेक्षा । आश्चर्य है कि अपने भारत वर्ष में भी वैदिक संस्कृति, सभ्यता, धर्म, भाषा, आचार-विचार तथा आदर्श परम्पराओं का विलोप होता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस की पुनःस्थापना के लिए दर्शन योग धाम, संस्कृतिवन, लाकड़ा, गुजरात में सर्व प्रथम ‘व्याकरण महाविद्यालय‘ का प्रारम्भ किया जा रहा है। जिसमें उच्च-स्तर के वैदिक विद्वानों के निर्माण हेतु प्रवेश प्रारम्भ है । सर्व साधनों से युक्त इस नव निर्मित संस्थान में क्रियात्मक योगाभ्याससहित पाणिनीय व्याकरण तथा प्राचीन ऋषिकृत ग्रन्थों का पठन-पाठन किया जाएगा। आशा है आत्मोद्धार व वेद विद्या के रक्षिष्णु युवा आकर गहन अनुशीलन कर अपने जीवन को कृतार्थ करेंगे ।


प्रवेश हेतु योग्यता
: प्राचीन आर्ष विद्या अध्ययन में रुचि ।न्यूनतम 10 वीं कक्षा या समकक्ष तक की योग्यता ।
विशेषताएँ
प्रत्येक ब्रह्मचारी को विद्यालय में भोजन, वस्त्र, आवास घी-दूध – फल, आसन, पुस्तक, चिकित्सा आदि की उत्तम निःशुल्क व्यवस्था

आयु 16 वर्ष से अधिक ।
: केवल अविवाहित पुरुष ।

अनुशासन पालन में श्रद्धा ।
है ।
पाणिनीय व्याकरण आदि अध्ययन के साथ प्रतिदिन प्रातः सायं उपासना, यज्ञ, वेदपाठ, वेदस्वाध्याय, आत्मनिरीक्षण आदि होते है । क्रियात्मक | योगप्रशिक्षण के माध्यम से विवेक वैराग्य, स्व-स्वामि-सम्बन्ध – ममत्व को हटाना, ईश्वर प्रणिधान, मनोनियन्त्रण, यमनियम पालन, ध्यान, समाधि
:- वैदिक धार्मिक विद्वान् व योगाभ्यासी बनने की अभिरुचि । आदि विषयों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। आध्यात्मिक उन्नति हेतु * प्रवेश परीक्षा में उत्तीर्णता । | प्रतिदिन कुछ काल मौन का पालन भी कराया जाता है ।


निवेदक– संयोजक, दर्शन योग प्रबंध समिति ( 9306374959)
संस्कृति वन, केनल रोड, लाकरोड़ा, ता माणसा जिला गांधीनगर – 232835 (गुजरात)
आवेदन व संपर्क हेतु पता :
दर्शनयोग धाम
वैदिक संस्कृति व गुरुकुलीय शिक्षा की सुरक्षा तथा संवृद्धि हेतु समर्पित…
मोबाइल: +91-9409615011, 8200915011 Email : darshanyog@gmail.com Web: https://www.darshanyog.org

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