विज्ञान का युग
सदाचार लोगों ने छोड़ा दुराचार अपनाया है।
धर्म कर्म सब भूल गए क्या ख़ूब ज़माना आया है।
सदाचार लोगों ने छोड़ा ……….
कोई किसी का मीत नहीं है।
प्यार यहाँ की रीत नहीं है।
नफ़रत ही नफ़रत फैली है
जीवन में संगीत नहीं है।
पर उपकार तजा मानव ने इसीलिए घबराया है।
धर्म कर्म सब भूल गए ……….
ख़तम हो गया भाईचारा।
कहाँ गया इख़लाक हमारा।
जिस जननी ने जन्म दिया था
उसी के दिल में खंजर मारा।
माँ की ममता घायल हो गई नयनन नीर बहाया है।
धर्म कर्म सब भूल गए ……….
पाप का भाण्डा फूट रहा है।
ख़ून का रिश्ता टूट रहा है।
भाई का दुश्मन हुआ है भाई
प्यार का दामन छूट रहा है।
आज पुराने आदर्शों को कोसों दूर हटाया है।
धर्म कर्म सब भूल गए ……….
कहने को विज्ञान का युग है।
मेहनत के वरदान का युग है।
कुदरत पर अधिकार कर लिया
समझदार इनसान का युग है।
कहो ‘पथिक’ सूरज निकला तो अन्धकार क्यों छाया है।
धर्म कर्म सब भूल गए ……….
























