हरियाणा के अभ्युत्थान में आर्य विभूतियों का योगदान

0
16

हरियाणा के अभ्युत्थान में आर्य विभूतियों का योगदान

लेखक :- डॉ वीरेंद्र कुमार अलंकार
प्रस्तुतकर्ता :- अमित सिवाहा

       ' आर्यसमाज ' हरियाणा के जनमानस में बसा हुआ है । समूचे भारत पर यह आर्यसमाज के व्यापक और लोकहितकारी सिद्धान्तों का ही प्रभाव है कि स्वयं को आर्यसमाजी न मानने वाला व्यक्ति भी आर्यसमाज के सिद्धान्तों को हृदय से स्वीकार करता है । यह आर्यसमाज का दिग्विजयी उद्घोष नहीं तो और क्या है कि आज स्वयं को पौराणिक या सनातनी मानने वाला व्यक्ति भी अपनी बेटी को संस्कृत सहित सभी विषय पढा रहा है और वेद सुनने पर कान में शीशा भरवाने की सोच नहीं सकता तथा यदि दुर्भाग्य से बेटी पर वैधव्य का दुःख आ पड़ा या विवाहविच्छेद हो गया तो यह पौराणिक पिता भी पुनर्विवाह की चिन्ता करता है । यह पौराणिक विद्वान् भी मानते हैं कि विलुप्त ' नमस्ते ' शब्द ऋषि दयानन्द के बाद ही लोकव्यवहार में आया है । सबसे बड़ी बात यह है कि जहाँ जहाँ आर्यसमाज फैला वहाँ वहाँ राष्ट्रवाद भी मुखरित हो गया । संस्कृतशास्त्रों पर पड़ी धूल उतरने लगी और व्यर्थ के शाब्दिक मल्लयुद्धों से बाहर आकर शास्त्र को तात्पर्यार्थ मिलने लगा । हिन्दी की भूमि मज़बूत हो गई । अमेरिका और कनाडा जैसे देशों में मैंने स्वयं देखा है कि वहाँ आर्यसमाज मन्दिरों में हिन्दी का प्रभुत्व है ।

        आर्यसमाज ने हरियाणाप्रदेश में भी संस्कृत को पुनरुज्जीवित किया है । उपर्युक्त विषय पर एक विशाल ग्रन्थ तैयार हो सकता है । किन्तु यहाँ केवल उन प्रमुख विभूतियों का ही संक्षिप्त उल्लेख किया जा रहा है , जिन्होंने इस क्षेत्र में जन्म लेकर या इसे अपनी कर्मभूमि बनाकर संस्कृत को लेखन से सींचा है । दूसरा उन विभूतियों का उल्लेख भी आवश्यक है , जिन्होंने सम - विषम परिस्थितियों में गुरुकुलों की स्थापना या संचालन करके संस्कृत अध्ययन का आधार तैयार किया है । इन आर्य विभूतियों की एक लम्बी सूची मेरे पास है । किन्तु यहाँ प्रमुख विभूतियों का ही उल्लेख किया जा रहा है

लेखक विभूतियाँ

      हरियाणा की भूमि ने ऐसे लेखक संस्कृत और शास्त्रजगत् को दिए हैं , जिन्होंने इस कृषिप्रदेश को विद्या के सारस्वत नीर से सींचा है । यहाँ अत्यन्त संक्षिप्त विवरण ही दिया जा रहा है -
  1. स्वामी आत्मानन्द सरस्वती
  2. ( पं 0 मुक्तिराम उपाध्याय ) स्वामीजी का जन्म 1879 में गाँव अंछाड़ जिला मेरठ में पं 0 दीनदयालु जी के घर हुआ एवं शिक्षा मेरठ व काशी में हुई । इन्होंने रावलपिण्डी के निकटवर्ती चोहा भक्तां गाँव में स्थित गुरुकुल में अपनी अध्यापन सेवा प्रारम्भ की । 1916 से 1947 तक ये गुरुकुल रावलपिण्डी के आचार्य रहे । फिर संन्यासाश्रम में प्रविष्ट हो गए और भारत विभाजन के बाद यमुनानगर आ गए । यहाँ इन्होंने ' वैदिक साधना आश्रम ' की स्थापना कर ' उपदेशक विद्यालय ' का संचालन किया । स्वामीजी आर्यप्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष भी रहे तथा पंजाब हिन्दी रक्षा सत्याग्रह के मुख्य सूत्राधर भी रहे । स्वामीजी कर्मठ आर्यसमाजी थे और साथ ही गम्भीर साधक व विद्वान् भी थे । इन्होंने इन ग्रन्थों की रचना की -1 सन्ध्या के तीन अंग , 2. सन्ध्या - अष्टांग योग , 3 वैदिक गीता ( गीता की व्याख्या ) , 4 मनोविज्ञान तथा शिवसंकल्प 5. गोमेधयज्ञपद्धति तथा 6 आत्मानन्दलेखमाला ( स्वामी जी के लेखों का संग्रह ) है । स्वामीजी का निधन 18 दिसम्बर 1960 को गुरुकुल झज्जर में हुआ ।
  3. स्वामी रामेश्वरानन्द सरस्वती स्वामीजी का जन्म एक कृषक परिवार में सन् 1890 में हुआ । ये गृहत्याग कर काशी चले गए और वहाँ में स्वामी कृष्णानन्द से संन्यास की दीक्षा ली । फिर ये स्वामी भीष्म जी के सान्निध्य से आर्यसमाज में दीक्षित हुए व शास्त्राध्ययन हेतु गुरुकुल ज्वालापुर चले गए और आचार्य स्वामी शुद्धबोध तीर्थ के चरणों में बैठ कर उनसे व्याकरण शास्त्र पढ़ा । इन्होंने दर्शन आदि शास्त्रों का अध्ययन भी खुर्जा व काशी में किया । इन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम में भी भाग लिया और आजादी के बाद लोकसभा के सदस्य भी रहे । स्वामीजी हैदराबाद सत्याग्रह व हिन्दी रक्षा आन्दोलन में जेल भी गए । स्वामीजी ने 17 अप्रैल 1939 को घरौण्डा ( करनाल ) में एक गुरुकुल की स्थापना भी की । स्वामीजी अच्छे चिन्तक तथा वक्ता थे । इनके ग्रन्थ हैं- महर्षि दयानन्द और राजनीति । 2 . महर्षि दयानन्द का योग , 3. सन्ध्याभाष्यम् 4. नमस्ते प्रदीप , 5 महर्षि दयानन्द और आर्यसमाजी पण्डित , 6 . विवाह पद्धति तथा भ्रमोच्छेदकम् । स्वामी जी का निधन 8 मई 1990 को हुआ ।
  4. पं 0 जयदेव शर्मा विद्यालंकार पं ० जयदेव शर्मा विद्यालंकार मीमांसातीर्थ का जन्म 1892 में अम्बाला जनपद के एक गाँव में श्री मुन्शी राम के घर हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी में हुई । सन् 1914 में विद्यालंकार स्नातक होकर इन्होंने गुरुकुल कांगड़ी तथा गुरुकुल मुल्तान में अध्यापन कार्य किया । ज्ञानमण्डल काशी व कलकत्ता में रहे व ' मीमांसा ' का विशेष अध्ययन किया । इन्होंने आर्यसाहित्य मण्डल , अजमेर के संस्थापक श्री मथुरा प्रसाद शिवहरे की प्रेरणा से वेदभाष्य का संकल्प लिया । जो 1925 से 1936 तक पूर्ण हुआ । 1949 से 1960 तक ये वनस्थली विद्यापीठ में प्राध्यापक रहे । 29 जनवरी 1961 को पं 0 जयदेव शर्मा का इस लोक से प्रयाण हुआ । इनके ग्रन्थ हैं- 1. ऋग्वेदभाष्य ( 7 भागों में ) , 2. यजुर्वेदभाष्य ( 2 भागों में ) 3. सामवेदभाष्य , 4 . अथर्ववेदभाष्य ( 4 भागों में ) , 5. माधवानुक्रमणी , 6. ईशोपनिषद् ( भाष्य ) , 7. यमयमी सूक्तव्याख्या , 8 . अथर्ववेद और जादूटोना , 9. क्या वेद में इतिहास है , 10. पुराणमतपर्यालोचन ( आचार्य रामदेव जी के सहलेखन में ) , 11. स्वामी दयानन्द सरस्वती के यजुर्वेदभाष्य तथा पं ० ब्रह्मदत्त जिज्ञासु के यजुर्वेद भाष्यविवरण की तुलना ( 1-10 अध्याय पर्यन्त ) , 12. आर्य समाज के उज्ज्वल रत्न तथा 13. हैदराबाद सत्याग्रह का रक्तरंजित इतिहास पं ० जयदेव शर्मा ने शेक्सपियर के कुछ नाटकों का संस्कृतानुवाद भी किया है , जो अप्रकाशित हैं । कदाचित् पहला हिन्दी वेदभाष्य ( चारों वेदों का ) देने वाला प्रदेश हरियाणा ही है ।
  5. श्री चारु देव शास्त्री शास्त्री जी का जन्म 8 मई 1896 को होशियारपुर ( पंजाब ) के गाँव अहियापुर में हुआ । इनकी उच्च शिक्षा पंजाब विश्वविद्यालय , लाहौर में हुई और वहीं डी.ए.वी. कालेज लाहौर में अध्यापन भी किया । विभाजन के पश्चात् उन्होंने डी.ए.वी कालेज ( लाहौर ) , अम्बाला शहर व गाँन्धी मैमोरियल कालेज , अम्बाला में 1953 तक अध्यापन किया । शास्त्री जी अनेक भाषाओं के विद्वान् थे । ये अच्छे कवि और वैयाकरणज्ञ थे । वर्ष 1965 में राष्ट्रपति डा . एस . राधकृष्णन् ने शास्त्री जी को ' विद्यावाचस्पति ' उपाधि से सम्मानित किया और वर्ष 1981 में बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय ने डी . लिट् उपाधि से विभूषित किया । शास्त्री जी के ग्रन्थ हैं- 1. गान्धिचरितम् , 2. विक्रमोर्वशीयम् का कई टीकाओं सहित सम्पादन , 3 . मालविकाग्निमित्रम् ( नीलकण्ठ टीकासहित ) का सम्पादन , 4. वाक्यपदीय ( ब्रह्मकाण्ड ) का स्वोपज्ञवृत्ति व वृषभदेव की वृत्ति सहित सम्पादन , 5. कुन्दमाला का सम्पादन , 6 Manual of Sanskrit Translation , 7. अनुवादकला , 8. प्रस्तावतरंगिणी , 9. शब्दापशब्दविवेक , 10. वाक्यमुक्तावली , 11 . महाभाष्यनवाह्निक की व्याख्या 12. व्याकरण चन्द्रोदय ( पाँच खण्डों में ) , 13. उपसार्गार्थचन्द्रिका , 14 . वाग्व्यवहारादर्श , तथा 15. श्रीमद्भागवत - भाषापरिच्छेद । शास्त्री जी को राष्ट्रपतिसम्मान से सम्मानित किया गया था । इनकी मृत्यु 8 मई 1987 को हुई ।
  6. डा ० सूर्यकान्त डा ० सूर्यकान्त का जन्म 1 जनवरी 1901 को सहारनपुर जनपद के गाँव सैदपुरा में श्री भीखनलाल के घर हुआ । ये गुरुकुल ज्वालापुर के विद्याभास्कर स्नातक थे । इन्होंने आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से 1937 में डी . फिल उपाधि प्राप्त की थी । इनका हरियाणा प्रवास बहुत लम्बा नहीं रहा है , फिर भी इनकी कर्मभूमि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुछ वर्षों के लिए अवश्य रही है । ये यहाँ संस्कृत विभाग में प्रोफेसर व अध्यक्ष थे । इनकी मृत्यु 1982 में हुई । इनके ग्रन्थ हैं- 1. सामवेद सर्वानुक्रमणी ( सम्पादन ) , 2. काठक ब्राह्मण संकलन , 3. काठक श्रौतसूत्रसंकलन , 4. लघुवातन्त्रसंग्रह , 5. सामसप्तलक्षण , 6. कौथुम गृह्यसूत्र 7. कौषीतकि गृह्यसूत्र । 8 . वैदिक देवशास्त्र ( मैक्डानल के वैदिक माइथोलॉजी का अनुवाद ) तथा 9. मारिस ब्लूमफील्ड की पुस्तक अथर्ववेद और गोपथब्रह्मण का अनुवाद ।
  7. आचार्य प्रियव्रत वेदवाचस्पति आचार्य जी का जन्म 1901 ( 1906 भी मिलता है ) में ग्राम भावुपुर , जिला पानीपत में श्री विजयसिंह के घर हुआ । इनकी सारी शिक्षा गुरुकुल कांगड़ी में हुई । 1925 में ये विद्यालंकार और फिर वेदवाचस्पति स्नातक हुए । फिर ये 1927 में आर्य - पत्रिका का सम्पादन सम्भाला और 1935 से 1943 तक लाहौर के कुलपति भी हुए और इस ऋषिकल्प विद्वान् को 1989 में गुरुकुल कांगड़ी का प्रस्तोता नियुक्त किया गया । इनका परलोकप्रयाण लगभग 96 वर्ष में हुआ । इनके प्रमुख ग्रन्थ ये हैं- 1. वरुण की नौका , 2. वेद का राष्ट्रीय गीत , 3. मेरा धर्म , 4. वेदोद्यान के चुने हुए फूल , 5. प्राचीन भारत में प्रतिरक्षाव्यवस्था , 6. वैदिक अर्थव्यवस्था , 7. समाज का कायाकल्प , 8. वैदिक राजनीति में राज्य की भूमिका 9. वैदिक राज्य की सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति , 10. वेद और उसकी वैज्ञानिकता तथा 11. वेदों के राजनैतिक सिद्धान्त ( तीन भागों में ) ।
  8. पं ० हरिश्चन्द्र विद्यालंकार इनका जन्म 2 सितम्बर , 1903 को गाँव फरमाणा ( सोनीपत ) में हुआ । विद्यालंकार स्नातक होने के पश्चात् इन्होंने गुरुकुल मुल्तान तथा गुरुकुल कुरुक्षेत्र में मुख्याध्यापक का कार्य किया । इनका देहावसान वर्ष 1974 में हुआ । इनकी रचनाएँ ये हैं- 1. सामवेद भाष्य , 2. मनुस्मृति - भाषानुवाद , 3. वैदिक शिष्टाचार , 4 . बालरामायण , 5. महर्षि दयानन्द सरस्वती जीवन चरित , 6. महात्मा हंसराज ( लघु जीवन चरित ) , 7 . आर्यसमाज का संक्षिप्त व सुबोध इतिहास । इन्होंने कई साप्ताहिक पत्रों का सम्पादन भी किया ।
  9. पं ० युधिष्ठिर मीमांसक मीमांसक जी ने संस्कृत शास्त्रों व आर्यसमाज की जो सेवा की है , वह अतुलनीय है । इनका जन्म 22 सितम्बर 1909 को गाँव विरकच्यावास , जिला अजमेर ( राजस्थान ) में पं ० . गौरीलाल आचार्य एवं श्री मती यमुना बाई के घर हुआ । इनकी संस्कृत शिक्षा स्वामी सर्वदानन्द द्वारा स्थापित विरजानन्द साधु आश्रम हरदुआगंज ( अलीगढ़ ) में आरम्भ हुई । मीमांसक जी ने प ० ब्रह्मदत्त जिज्ञासु के चरणों में बैठकर संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन किया । मीमांसक जी वेद , व्याकरण व मीमांसाशास्त्र के अद्भुत विद्वान् थे । इन्होंने अनेक शोधपूर्ण ग्रन्थों का लेखन व अनेक ग्रन्थों का सम्पादन व व्याख्यान भी किया है । इनके लिखित , शोधित व सम्पादित ग्रन्थ ये है- 1. संस्कृत व्याकरण शास्त्र का इतिहास ( 1-3 भाग ) , 2. वैदिक स्वरमीमांसा , 3. वैदिक छन्दोमीमांसा , 4. ऋषि दयानन्द के ग्रन्थों का इतिहास , 5. ऋग्वेद की ऋक्संख्या , 6. छन्दशास्त्र का इतिहास ( अप्रकाशित ) 7. शिक्षाशास्त्र का इतिहास ( अप्रकाशित ) , 8 . निरुक्तशास्त्र का इतिहास ( अप्रकाशित ) , 9. अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेध पर्यन्त श्रौतयज्ञों का परिचय , 10 . निरुक्तसमुच्चय 11. भागवृत्तिसंकलनम् , 12. दशपाद्युणादिवृत्ति , 13. शिक्षासूत्राणि , 14. क्षीरतरंगिणी , 15 . दैवं पुरुषकारवार्तिकोपेतम् , 16. काशकृत्स्न धातुपाठ , 17. काशकृत्स्नव्याकरणम् , 18. माध्यन्दिन पदपाठ , 19. ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका ( टिप्पणियों सहित ) , 20. ऋग्वेदभाष्य - दयानन्द सरस्वती ( टिप्पणियों , परिशिष्टों सहित ) 21. उणादिकोश ( दयानन्द सरस्वती ) , 22. महाभाष्य ( व्याख्या ) , 23. मीमांसा शाबरभाष्य ( हिन्दी टीका ) , 24. ऋषि दयानन्द के पत्र और विज्ञापन , 25. दयानन्द प्रवचन संग्रह , 26. दर्शपूर्णमासपद्धति , 27 . संस्कारविधि ( दयानन्द ) , 28. सत्यार्थप्रकाश ( दयानन्द ) आदि अनेक ग्रन्थों का सम्पादन व लेखन । वर्ष 1977 में मीमांसक जी को राष्ट्रपति सम्मान प्रदान किया गया ।
  10. पं ० विद्यानिधि शास्त्री आचार्य विद्यानिधि शास्त्री का जन्म 18 सितम्बर , 1911 में गाँव लोहारी ( पानीपत ) में हुआ । शास्त्री जी की शिक्षा गुरुकुल भैंसवाल कलाँ ( सोनीपत ) में हुई । आचार्य जी वेद व व्याकरण के अद्भुत विद्वान् थे । इन्हें अष्टाध्यायी कण्ठस्थ थी और प्रतिदिन उसका पाठ किया करते थे । इन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय लाहौर से शास्त्री परीक्षा उत्तीर्ण की । इनकी प्रमुख कर्मभूमि तो मातृसंस्था गुरुकुल भैंसवाल ही रही , किन्तु इन्होंने कुछ समय विश्वेश्रानन्द वैदिक शोध संस्थान होशियारपुर , गुरुकुल झज्जर , शीतला मन्दिर संस्कृत पाठशाला , डी.ए.वी. कालेज लाहौर , गुरुकुल पाटोदार ( रावलपिण्डी ) , गुरुकुल आर्य नगर , हिसार , गुरुकुल मटिण्डु , आर्य हाई स्कूल पानीपत , गुरुकुल कुरुक्षेत्र आदि संस्थाओं में भी अपनी सेवाएँ दी है । आचार्य विद्यानिधि व्याकरण महाभाष्य के विलक्षण विद्वान् थे तथा साथ ही सहृदय कवि भी थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ ये है- 1 . व्यवहारभानु : ( संस्कृत रूपान्तर ) , 2. दयानन्दचन्द्रोदयम् ( गद्यकाव्य ) , 3. श्रीगान्धिचरितामृतम् , 4 . भक्तफूलसिंहचरितम् , 5. इन्दिराकीर्तिशतकम् ( अप्रकाशित ) , 6. मैत्रायणी सूक्तिसंग्रह , तथा 7. संक्षिप्ते रामायणमहाभारते । वर्ष 1991 में राष्ट्रपति सम्मान के लिए इनके नाम का चयन हुआ , किन्तु इनका देहावसान 15 जुलाई , 1991 को पुरस्कारप्राप्ति से पहले ही हो गया ।</code></pre></li>
  11. पं 0 विष्णुमित्र विद्यामार्त्तण्ड आचार्य विष्णुमित्र जी का जन्म अगस्त 1913 में गाँव बुवाना लाखु जिला करनाल में हुआ । आचार्य जी गुरुकुल भैंसवाल कलाँ के स्नातक थे । आचार्य जी वेद , उपनिषद् , दर्शन , रामायण व महाभारत के विशेष पण्डित थे । वर्ष 1970-71 में भारत सरकार ने राष्ट्रीय पुरस्कार से इन्हें सम्मानित किया और वर्ष 1971-72 में हरियाणा सरकार द्वारा सम्मानित हुए । वर्ष 1976 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय ने ' विद्यामार्त्तण्ड ' उपाधि से अलंकृत किया । आचार्य जी प्रभावी वक्ता व लेखक थे । ये आजीवन गुरुकुल खानपुर के उपकुलपति रहे । इन्होंने प्राय : गद्यात्मक ही लिखा है । उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. स्वामिदयानन्दचरितम् , 2 . नेहरुचरितम् । 3. इन्दिरागान्धीचरितम् , 4. संक्षिप्तरामायणम् , 5. संक्षिप्तमहाभारतम् , 6. कांग्रेसस्य ऐतिह्यम् , 7. लौहपुरुषसरदारपटेलचरितम् , 8. महाभारत का व्यावहारिक पक्ष तथा 9. भक्तफूलसिंह चरित ( हिन्दी में ) ।
  12. स्वामी विद्यानन्द सरस्वती स्वामी विद्यानन्द सरस्वती ( पूर्व नाम पं ० लक्ष्मी दत्त दीक्षित ) का जन्म 20 अगस्त 1915 को बिजनौर ( उत्तरप्रदेश ) में हुआ । दीक्षित जी लम्बे समय तक आर्य कालेज पानीपत के प्राचार्य रहे हैं । स्वामी जी स्वतन्त्रता सेनानी थे साथ ही प्रभावी वक्ता और समर्थ लेखक भी थे । इनकी रचनाएँ हैं- महर्षि दयानन्द का राजनीति शास्त्र , 2. राजधर्म , 3. Political Science ( राजधर्म का अनुवाद ) 4. अनादितत्त्वदर्शन , 5 . वेदमीमांसा , 6. अध्यात्ममीमांसा , 7. त्यागवाद , 8. तत्त्वमसि अथवा अद्वैतमीमांसा 9. प्रस्थानत्रयी और अद्वैत वेदान्त , 10 द्वैतसिद्धि , 11. The Theory of Reality 12. The Age of Shankar ( पं . उदयवीर शास्त्री के एक ग्रन्थांश का अनुवाद ) , 13. Vedic concept of God , 14. The Brahma Sutra : A New Approach , 15. आर्यो का आदि देश और उनकी सभ्यता , 16. भूमिका भास्कर ( ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका व्याख्या ) , 17. सत्यार्थप्रकाश भास्कर तथा 18. आत्मकथा । स्वामी जी की मुख्य कर्मभूमि पानीपत रही है ।
  13. डॉ ० श्रीनिवास शास्त्री डा ० श्रीनिवास शास्त्री का जन्म गाँव रसूलपुर जाहिद ( मेरठ ) में 1-8-1916 को हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल चित्तौड़गढ , गुरुकुल सौरली , खुर्जा और बनारस में हुई । शास्त्री जी की कर्मभूमि संस्कृत विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय थी , ये यहाँ दयानन्द शोधपीठ के प्रोफेसर भी थे । शास्त्री जी लेखन के धनी । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. संक्षिप्त ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका , 2. काव्यप्रकाश ( व्याख्या ) , 3 . मृच्छकटिक ( व्याख्या ) , 4. दशरूपक की अवलोकन टीका ( सम्पादन व व्याख्या ) , 5. वाचस्पतिमिश्र द्वारा बौद्ध दर्शन का विवेचन 6. संस्कृत रचनानुवादप्रभा , 7. तर्कभाषा ( वृहद्व्याख्या ) , 8 . कादम्बरी ( पूर्वार्ध - व्याख्या ) , धर्मोत्तरकृत न्यायबिन्दु टीका ( सम्पादन व व्याख्या ) , 10 . न्याय कुसुमांजलीकारिका ( सम्पादन व व्याख्या ) , 11. दयानन्द दर्शन : एक अध्ययन , 12. वेद तथा ऋषि दयानन्द , 14. वेदनित्यता तथा ऋषि दयानन्द , 15. प्रशस्तपादभाष्य ( व्याख्या ) , तथा 16. न्यायवार्तिक ( सम्पादन ) । शास्त्री जी का देहावसान 14 जून , 1992 को हुआ ।
  14. डा 0 सुधीर कुमार गुप्त डा ० गुप्त की जन्मभूमि हरियाणा व कर्मभूमि राजस्थान रही है । इनका जन्म 1 मई 1917 को ग्राम अटाली ( गुड़गाँव ) में हुआ । इन्होंने जाट कालेज रोहतक , नत्थीमल कालेज खुर्जा तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय में भी अपनी सेवाएँ दी हैं , फिर ये रीडर रूप में राजस्थान विश्वविद्यालय , जयपुर चले गए । डा ० गुप्त वेद के विद्वान् थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- वेदलावण्यम् , 2. वेदभारती , 3. रावणभाष्यम् ( सूर्यपण्डित की टीका के साथ सम्पादन व हिन्दी व्याख्या ) , 4. भारतीय दर्शन के सम्प्रदाय , 5. संस्कृत साहित्य का सुबोध इतिहास , 6. वेदभाष्यपद्धति को दयानन्द सरस्वती की देन तथा 8. मेघदूत ( व्याख्या ) ।
  15. प्रो 0 सत्यभूषण योगी वेदालंकार प्रो ० सत्यभूषण जी का जन्म 14 नवम्बर 1917 को हुआ । इनके पिता पं ० रामदेव गुरुकुल कांगड़ी के आचार्य थे । इनका स्थायी निवास अम्बाला में हैं । ये सेंट स्टीफेंस कालेज , दिल्ली में प्रवक्ता थे । इनके ग्रन्थ हैं- निरुक्त ( डा ० लक्ष्मण स्वरुप के ग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद ) , 2. मनुस्मृति ( प्रथम दो अध्याय ) , 3. मण्डूक एवं पुरुष सूक्त का अध्ययन , 4. स्वामी दयानन्द का जीवन तथा 5. स्वामी दर्शनानन्द का जीवन ।
  16. स्वामी वेदानन्द वेदवागीश स्वामी वेदानन्द का जन्म 1920 में गाँव गठीना ( मेरठ ) में हुआ । इन्होंने गुरुकुल चित्तौड़गढ़ में अध्ययन करते हुए 1945 में वेदवागीश उपाधि ग्रहण की । फिर ये स्वामी आत्मानन्द के आश्रम रावलपिण्डी चले गए । वहाँ से पुन : गुरुकुल चित्तौड़गढ़ में मुख्याधिष्ठाता व आचार्य के रूप में सेवा की और 1968 गुरुकुल झज्जर आ गए और आचार्य के रूप में आजीवन सेवा की । 4 जून 1987 को इनका देहावसान हुआ । स्वामी जी विद्वान् व निष्णात लेखक थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. तत्त्वबोध , 2. ईशोपनिषद् ( व्याख्या ) , 3. श्रीमद्भगवद्गीता ( टीका ) , 4. आचार्य मेधाव्रतप्रणीत दयानन्दलहरी की टीका , 5. ब्रह्मचर्यमहत्त्वम् , ( टीका ) , 6. ब्रह्मचर्यशतकम् ( टीका ) , 7. जीवात्मा अणुर्वा विभुर्वा , 8 . जीवात्मा का परिणाम , 9. भारत की एक विभूति दयानन्द सरस्वती , 10. स्वामी आत्मानन्द - जीवनज्योति , तथा 11. सच्चे गुरु और पारखी ।
  17. डा ० सत्यकाम वर्मा डा ० वर्मा का जन्म सन् 1926 में अम्बाला छावनी में श्री विद्याधर विद्यालंकार के घर हुआ । वर्मा जी गुरुकुल कांगडी के आयुर्वेदालंकार स्नातक हैं । फिर हिन्दी व संस्कृत में एम.ए. तथा पीएच.डी. ( संस्कृत ) के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग में रीडर व प्रोफेसर रहे और गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में भी सेवाएँ दी । वर्मा जी व्याकरण और भाषाविज्ञान के पण्डित थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. वेदसुमन , 2. कठोपनिषद् , 3. वेदवाटिका , 4. वाक्यपदीय का भाषातात्त्विक विवेचन , 5. संस्कृत व्याकरण का उद्भव और विकास , 6. वाक्यप्रदीप ब्रह्मकाण्ड ( त्रिभाषी टीकाएँ ) तथा 7 . Flash of Truth .
  18. डा 0 कपिल देव शास्त्री डा ० कपिल देव शास्त्री का जन्म उत्तरप्रदेश के गाँव शिवपुरी ( गोरखपुर ) में 10 दिसम्बर , 1927 को हुआ । शास्त्री जी ने लाहौर में पं ० युधिष्ठिर मीमांसक तथा पं ० ब्रह्मदत्त जिज्ञासु से व्याकरणशास्त्र पढ़ा तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. , पीएच.डी. करने के उपरान्त संस्कृत विभाग , कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में आ गए और यहीं दयानन्द शोधपीठ के अध्यक्ष भी बने । शास्त्री जी के प्रमुख ग्रन्थ हैं- 1 . वैदिक ऋषि : एक परिशीलन , 2. ऋषिदयानन्दकृत यजुर्वेदभाष्य में अग्नि का स्वरूप , 3. वैयाकरणसिद्धान्त परमलघुमंजूषा ( व्याख्या ) , 4. वैयाकरण सिद्धान्तमंजूषा ( सम्पादन ) , 5. संस्कृत व्याकरण में गणपाठ की परम्परा और आचार्य पाणिनि , तथा 6. The Ganapatha Ascribed to Panini .
  19. आचार्य विजयपाल विद्यावारिधि आचार्य जी का जन्म 25 जनवरी , 1929 को गाँव आसिफ उजैड़ा ( गाजियाबाद ) में श्री बुध सिंह के घर हुआ । आचार्य जी ने संस्कृत शास्त्रों का अध्ययन आर्ष गुरुकुल एटा में आचार्य ज्योतिस्वरूप तथा वाराणसी में पं ० ब्रह्मदत्त जिज्ञासु के चरणों में किया । आचार्य जी की कर्मभूमि हरियाणा रही हैं । पं ० युधिष्ठिर मीमांसक के सान्निध्य में इन्होंने रामलाल कपूर ट्रस्ट द्वारा संचालित संस्कृत महाविद्यालय , रेवली ( पहले बहालगढ़ ) में उल्लेखनीय अध्यापन व शोधकार्य किया है । आचार्य जी को हरियाणा सरकार ने महर्षि वाल्मीकि सम्मान से अलंकृत किया है । इनके द्वारा लिखित व सम्पादित कार्य ये हैं- 1. अष्टाध्यायी शुक्लयजुः प्रातिशाख्ययोर्मतविमर्श : ( शोधग्रन्थ ) , 2. गोपथ - ब्राह्मणम् , 3. कात्यायनीयक् सर्वानुक्रमणी , 4 . ऋग्वेदानुक्रमणी , 5. निरुक्तश्लोकवार्त्तिकम् , 6. पिंगलछन्द : सूत्रम् , 7. बौधायनश्रौतसूत्रम् 8. काशिका 9 . निघण्टुनिर्वचनम् व 10. माधवीया धातुवृत्तिः ।
  20. डा 0 सुदर्शन देव आचार्य आचार्य सुदर्शन देव का जन्म 7 दिसम्बर , 1937 को गाँव बालन्द ( रोहतक ) में श्री शिवदत्त आर्य व श्रीमती रजकां देवी के घर हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल झज्जर में हुई । इन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय , चण्डीगढ़ से एम.ए. ( संस्कृत ) तथा फिर पी.एच.डी. उपाधि प्राप्त की और हरियाणा के राजकीय कालेजों में प्राध्यापन किया । आचार्य जी वेद और व्याकरण के प्रकाण्ड पण्डित थे तथा सिद्धहस्त लेखक थे । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. दयानन्द यजुर्वेदभाष्यभास्कर , 2. वेदभाष्यविबोध , 3. आर्याभिविनय ( टीका ) , 4 . शिक्षावेदांग के सिद्धान्त एवं परम्परा , 5. वर्णोच्चारणशिक्षा ( वृत्ति ) , 6. बाल संस्कारविधि , 7. वैदिक उपासना पद्धति , 8. दयानन्द सन्ध्याहवनपद्धति , 9 वर्षेष्टियज्ञपद्धति , 10. व्याकरणकारिकाप्रकाश , 11 . फिट्सूत्रप्रदीप , 12. लिंगानुशासनवृत्ति , 13. व्याकरणशास्त्रम् ( दो भाग ) , 14. पाणिनीय अष्टाध्यायी प्रवचन ( 6 भाग ) । आचार्य सुदर्शनदेव ने अनेक ग्रन्थों का सम्पादन भी किया है । हरियाणा सरकार ने इनको ' महर्षि वाल्मीकि पुरस्कार ' से सम्मानित किया ।
  21. डा 0 रामप्रकाश डा ० रामप्रकाश का जन्म 5 अक्तुबर , 1939 को बरवाला ( कुरुक्षेत्र ) में महाशय प्रभुदयाल के घर हुआ । आप पंजाब विश्वविद्यालय , चण्डीगढ के कैमिस्ट्री विभाग में प्रोफेसर थे । कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति तथा राज्यसभा सांसद भी रहे । आप वेद , आर्यसमाज और ऋषि दयानन्द के गम्भीर अध्येता , वक्ता तथा लेखक हैं । इस समय आप गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी हैं । आपके प्रमुख ग्रन्थ हैं- 1. गुरु विरजानन्द दण्डी - जीवन एवं दर्शन , 2. पं 0 गुरुदत्त विद्यार्थी ( जीवन चरित ) , 3. दण्डी जी का जीवन ( दुर्लभ ग्रन्थ का सम्पादन ) , सत्यार्थप्रकाश विमर्श तथा 5 . Vidyarthi तथा यज्ञविमर्श । Works of Pt . Gurudatta
  22. डॉ ० सुभाष वेदालंकार डा ० सुभाष वेदालंकार का जन्म 13 अप्रैल 1942 को अविभाजित भारत के डेरा इस्माईल खान प्रान्त के टोक शहर में श्री गोवर्धनलाल तनेजा व श्रीमती सुन्दरी देवी के घर हुआ । सुभाष जी की आरम्भिक शिक्षा गुरुकुल कुरुक्षेत्र में हुई । गुरुकुल कांगड़ी से वेदालंकार व राजस्थान विश्वविद्यालय , जयपुर से एम.ए. , पीएच.डी. करके राजस्थान में ही सेवा की । राजस्थान विश्वविद्यालय में अध्यक्ष व प्रोफेसर रहे और स्थायी निवास पानीपत में बनाया । ये गीतकार के रूप में प्रसिद्ध हैं । इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. कुरलचित्रणम् , 2 . ईशकाव्यम् , 3. शैक्सपियरशतकम् , 4. संस्कृतगीताजंलि :, 5. अमृतलहरी , 6. अमरेश्वरयात्राविलासम् , 7 . स्वप्नसुन्दरीमहाकाव्यम् , 8. शिमलाविलासः , 9. वाराणसीविलासः , 10. त्रिवेन्द्रमविलासः , 11 . ईशभक्तिगीतम् , 12. हिमाद्रिविलासः , 13. महाराणाप्रतापचरितम् , 14. मनीषाचरितम् , 15. ईशस्तोत्रम् , 16 . संस्कृतचलचित्रगीतम् , 17. दक्षिणावर्त्तविलासः , 18. उत्तरांचलविलासः , 19. जम्मूकश्मीरविलासः , 20 . अयोध्याविलासः , 21. मथुराविलासः , 22. संस्कृत - आर्यगीतम् , 23. हृदयेश्वरी - गृहेश्वरी ( उपन्यास ) 24 . श्रीमद्भगवद्गीतम् , 25. संस्कृतशिशुगीतम् , 26. भारतगौरवम् 27. संस्कृतदेशभक्तिगीतम् , 28 . कश्मीरदर्शनम् , 29. चण्डीगढ़विलासः , 30. तिरुपतिविलासः , 31 राजस्थानविलास :, 32 संस्कृतगीतशतकम् , 33. सुभाषसप्तशती , 34. भारतीगौरवम् , 35. संस्कृतिसुधा , 36 . विवेचना , 38. संस्कृतदर्शनदीपिका , 39. महाकवि कल्हण वैदिकसंस्कृतिपरिचयः , 37. वेदों की वैज्ञानिक एवं राजतंरागिणी , 40. वैदिकचिन्तनधारा आदि ।
  23. आचार्य विरजानन्द दैवकरणि आचार्य दैवकरणि का जन्म 2 दिसम्बर , 1945 को गाँव भगड्याण ( महेन्द्रगढ़ ) में श्री देवकरण तथा श्रीमती सरयाँ देवी के घर हुआ और शिक्षा - दीक्षा गुरुकुल झज्जर में हुई । आप कई लिपियों को जानते हैं तथा पुरातत्त्वविद् हैं । आपकी महत्त्वपूर्ण रचनाएँ हैं- 1. महर्षिदयानन्द और उनके सिद्धान्त , 2. भारतीय इतिहास के स्रोत , 3. कुतुबमीनार : एक रहस्योद्घाटन , 4. स्वस्तिक चिह्न - ओ ३ म् का प्राचीनतम रूप , 5. महाभारत युद्ध , 6. छन्दोग्रन्थ का हिन्दी अनुवाद , 7. सत्यार्थप्रकाश का सम्पादन , इसके अतिरिक्त महात्मा बुद्ध , आदिशंकराचार्य , सिकन्दर और हर्ष के कालक्रम पर भी आपने लेखन किया है ।
  24. डा ० सुरेन्द्र कुमार डा ० सुरेन्द्र कुमार का जन्म 12 जनवरी , 1951 को गाँव मकड़ौली कलाँ ( रोहतक ) में श्री गहरसिंह व श्रीमती शान्ति देवी के घर हुआ व शास्त्री शिक्षा गुरुकुल झज्जर में हुई । आप हिन्दी और संस्कृत में एम.ए. तथा पीएच.डी. हैं । हरियाणा के राजकीय महाविद्यालयों में लम्बे समय तक हिन्दी प्राध्यापक के रूप में और फिर प्राचार्य के रूप में सेवा करने के उपरान्त इस समय गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय , हरिद्वार के कुलपति हैं । आपकी प्रमुख रचनाएँ हैं- 1. मनुस्मृति ( भाष्य ) , 2. विशुद्ध मनुस्मृति , 3. वैदिक आख्यानों का वैदिक स्वरूप , 4. हिन्दी काव्यों में वैदिक आख्यान , 5. महर्षि दयानन्द के यजुर्वेदभाष्य में संगति , 6. मनु का विरोध क्यों , 7 . महर्षि दयानन्द वर्णित शिक्षापद्धति , 8. महर्षि मनु बनाम डा ० अम्बेडकर , 9. आर्ष शिक्षा की उपयोगिता , 10 . ईश्वरोपासना से साधारण जनों को लाभ , 11. वाल्मीकि रामायाण : प्रक्षेपानुसन्धान , भाष्य एवं समीक्षा तथा 12. सत्यार्थप्रकाश का विवेचनात्मक सम्पादन ।
  25. डा ० बलवीर आचार्य आचार्य जी का जन्म 23 मई , 1952 को गाँव फजलपुर ( बागपत ) , उत्तरप्रदेश में श्री हरबंसलाल के घर हुआ व शिक्षा गुरुकुल झज्जर तथा गुरुकुल कांगड़ी में हुई । आप संस्कृत विभाग , महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक में प्रोफेसर तथा विभागाध्यक्ष रहे । आपके प्रमुख ग्रन्थ हैं- 1. ब्राह्मण ग्रन्थों में राजनीतिक सिद्धान्त , 2. ऋग्वेद ब्राह्मणों का सांस्कृतिक अध्ययन , 3. शिक्षा वेदांग - परम्परा और सिद्धान्त , 4 . वैदिक उपासना प्रदीप , 5. वेदकालीन युद्ध - आयुध एवं सैन्य संघटन , 6. वैदिक सिद्धान्त मीमांसा तथा 7 . वैदिक उपासना विधि ।
  26. डा ० वेदपाल वर्णी डा 0 वर्णी का जन्म 10 अगस्त 1953 को गाँव बरहाणा ( रोहतक ) में श्री हुक्म चन्द के घर हुआ तथा अध्ययन गुरुकुल झज्जर व गुरुकुल कांगड़ी में हुआ । पंजाब विश्वविद्यालय , चण्डीगढ़ से एम.ए. ( संस्कृत ) व पीएच.डी. की । डा ० वर्णी ने उड़ीसा , मेरठ व गुरुकुल होशंगाबाद में अध्यापन भी किया । ये वेद के अच्छे विद्वान् तथा लेखक थे । इनकी रचनाएँ हैं- 1. शतपथसुभाषित , 2. वैदिक शोधनिबन्ध , 3. सोमविमर्श , 4. संस्कृत स्वयं शिक्षक , 5. पं 0 बुद्धदेव विद्यालंकार कृत शतपथब्राह्मणभाष्य ( आंशिक ) का आलोचनात्मक अध्ययन तथा 6. माध्यन्दिनीयशतपथ - दयानन्दीययाजुषभाष्ययोः तुलनात्मकमध्ययनम् ( शोधग्रन्थ ) ।
  27. डा ० रणवीर सिंह डा ० रणवीर सिंह का जन्म 20 अगस्त 1953 गाँव गवालड़ा ( पानीपत ) में श्री बृहस्पति शास्त्री के घर हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल भैंसवालकलाँ तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हुई । आप साधु आश्रम होशियारपुर में प्राध्यापक हो गए । 1985 में आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय आ गए और संस्कृत एवं प्राच्यविद्या शोधसंस्थान में शोधप्राध्यापक , प्रोफेसर व निदेशक के रूप में सेवाएँ दी । आपके ग्रन्थ हैं- 1. संस्कृत कोषों का उद्भव और विकास , 2. महाभारतपदानुक्रमकोश ( कई भाग ) के मुख्य सम्पादक , 3 . प्राचीज्योति ( विश्वविद्यालय पत्रिका के कई अंकों के सम्पादक ) 4. युगयुगीन कुरुक्षेत्र ( सम्पादन ) , 5 . कुरुज्योति ( सम्पादक ) , 6. प्राच्यविद्या सम्मेलन ( 44 वें सत्र ) के शोधपत्रों का सार ( मुख्य सम्पादक ) , 7 . स्मारिका ( विशिष्ट लेखों का सम्पादन ) , 8. अनेकार्थध्वनिमंजरी ( सम्पादन ) 9. वसुमतीपरिणय नाटक ( सम्पादन ) तथा 10. महाभारत की विषयानुक्रमणी ( चार अनुक्रमणियाँ ) ।
  28. डा ० भीम सिंह डा ० भीम सिंह का जन्म 5 जनवरी , 1956 को गाँव लोहारी ( पानीपत ) में विद्वान् पिता पं . विद्यानिधि शास्त्री के घर हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल भैंसवालकलाँ तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हुई । इन्होंने पंजाबी विश्वविद्यालय , पटियाला में लगभग 10 वर्ष सेवाएँ दीं और 1998 से कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग में हैं । आप व्याकरण शास्त्र के विद्वान् हैं । आपके प्रमुख ग्रन्थ हैं- 1. पतंजलि महाभाष्य में प्रत्याख्यात सूत्र : एक समीक्षात्मक अध्ययन , 2. पतंजली महाभाष्य में अपूर्व कल्पनाएँ , 3. व्याकरणशास्त्रीय लोकन्याय , 4. संस्कृत - पंजाबी कोश ( सहसम्पादन ) , 5. संस्कृत व्याकरणदर्शन तथा 6. व्याकरण महाभाष्य ( विद्यानिधि हिन्दी व्याख्या ) । आप प्रोफेसर के पद पर हैं तथा विभागाध्यक्ष भी रहे हैं । हरियाणा सरकार ने इनकों बाणभट्ट सम्मान में पुरस्कृत किया है ।
  29. डा 0 वीरेन्द्र कुमार अलंकार डा ० अलंकार का जन्म 15 अक्तुबर , 1962 को गोहाना ( सोनीपत ) में प्रसिद्ध आर्यसमाजी महाशय सुखदयाल आर्य व श्रीमती गार्गी के घर हुआ । इनकी शिक्षा गुरुकुल आर्यनगर हिसार , गुरुकुल भैंसवाल व कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में हुई । तीन वर्ष कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएँ देने के उपरान्त वर्ष 1990 से पंजाब विश्वविद्यालय , चण्डीगढ़ के संस्कृत विभाग में हैं तथा इस समय संस्कृत विभाग में अपनी सेवाओं के साथ साथ दयानन्द वैदिक अध्ययनपीठ के भी अध्यक्ष हैं । आप वेद , व्याकरण और दर्शन के विद्वान् , वक्ता और लेखक हैं । आप संस्कृत के कवि भी हैं और समीक्षात्मक अनुसन्धानकर्त्ता भी । आप के प्रमुख ग्रन्थ ये हैं 1. देवप्रशास्तिकाव्यम् ( काव्य ) , 2. अपूर्वलोक : ( काव्य ) , 3. भारतीकाव्यम् ( काव्य ) , 4 . पद्यचन्द्रोदयम् ( काव्य ) , 5. प्रपंचपंचशती ( काव्य ) , 6. लिङ् लकार रूप एक दार्शनिक दृष्टि , 7. संस्कृत व्याकरण में लकारार्थ विवेचन , 8. मीमांसाया ज्ञानमीमांसा , 9. पालिप्पदीपिका 10. गोपथनिर्वचनविज्ञान , 11. मीमांसा दर्शन - तर्क का अध्ययन , 12. हरियाणा की संस्कृत साधना तथा 13. स्वामी देवानन्द सरस्वती - दृष्टि और दिशा ।
  30. डा ० अलंकार को हरियाणा सरकार द्वारा महाकवि बाणभट्ट सम्मान तथा महर्षि वेदव्यास सम्मान से सम्मानित किया गया है । दिल्ली संस्कृत अकादमी व डी.ए.वी. प्रबन्धकर्त्री समिति , नई दिल्ली भी उत्कृष्ट लेखन व शास्त्रवैदुष्य के लिए सम्मानित कर चुकी है ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here