भक्ति में मन प्रहित में तन जब तेरा हो जायेगा।

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भक्ति में मन प्रहित में तन जब तेरा हो जायेगा।

भक्ति में मन प्रहित में तन
जब तेरा हो जायेगा।
तब तुझे खुद के ही भीतर
परमात्मा मिल जायेंगा।।

१ जिन्दगी का क्या भरोसा,
आज है कल को नहीं।
मौत सिर पर आ विराजे,
हो सके तब कुछ तो नहीं।
वक्त रहते चेत पगले,
वरना फिर पछतायेगा……

२. साथ देने जो चले हैं,
भूल ही सब जायेगें।
डालकर तुझको चिता में,
लौटकर घर आयेगें।
पाला था जो तन यत्न से,
खाक में मिल जायेगा……

३. छल कपट और पाप से ही,
बस तेरा नाता रहा।
दीन-दुःखियों-निर्बलों को
दुःख ही दुःख देता रहा।
सोच ले. तू जैसा बोता,
वैसा ही फल पायेगा….

४. मोक्ष साधन श्रेष्ठ जीवन,
तुझको वेदों से मिले।
‘गोविन्द’ इस पथ पर चलें तो,
फूल जीवन में खिलें।
वेद वाणी को न तजना,
वरना फिर पछतायेगा…..