(१)🌴💐🌷
कंगाली ना निकट में आती,
जो जनहित ही दान करे।
मान उसी का होता जग में,
औरों का जो मान करे।
मूढ मति ना होती उसकी,
प्राप्त वेद का ज्ञान करे।
“धर्मी” दु:ख नहीं होता उसको,
ईश्वर का जो ध्यान करे।
(२)🙏🌷💐
जो जन करता लेन देन,
वह लक्ष्मी का सुख पाता है।
जो जन करता ईश भजन,
वह पापों से बच जाता है।
जो जन रहता मौनी बनकर,
कलह निकट नहीं आता है।
जो जन रहता गाढ नींद में,
“धर्मी” भय नहीं खाता है।
(३)💐🌴🌷
ब्रह्मचर्य का व्रत जो धारे,
जीवन का सुख पाता है।
हृष्ट पुष्ठ हो करके जग में,
लक्ष्मी खूब कमाता है।
भली कमाई के कारण से,
भलों में मान कराता है।
ग्रहस्थ धर्म का पालन करके,
वानप्रस्थ में आता है।
(४)🪴🌹🌴
ब्रह्मचर्य के काल में”धर्मी”,
विद्या का अभ्यासी हो।
ग्रहस्थ धर्म में रहकर के वह,
हर जन का सुखरासी हो।
वानप्रस्थ में घर को तज कर,
वन का ही वनवासी हो।
जिस दिन हो वैराग्य प्राप्त,
वह उसी दिना सन्यासी हो।










