“निराकार की महिमा निराली”निर्गुण ईश्वर का भजन

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निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

जल थल में बसे, नभ चर में बसे
कोई जगह न इससे खाली
निराकार बसे डाली डाली
निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

फूल-उपवन-कली में समाया यही
निराकार है अद्भुत माली
निराकार बसे डाली डाली
निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

चमके चाँद में यही और सितारों में यही
निराकार की सूरज में लाली
निराकार बसे डाली डाली
निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

बिना आँख के देखे – बिना पाँव के चले
जन जन की करे रखवाली
निराकार बसे डाली डाली
निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

निराकार की महिमा “अजय” क्या लिखे
जिसने भक्तों की लाज बचा ली
निराकार बसे डाली डाली
निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली

निराकार की महिमा निराली
निराकार बसे डाली डाली