ओ३म् नाम लिये जा, तू दान दिये जा।

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ओ३म् नाम लिये जा, तू दान दिये जा।

ओ३म् नाम लिये जा,
तू दान दिये जा।
आने वाली मुश्किलें,
आसान किये जा।।
खाना-पीना पहनना और,
सोना तो जरूरी है।

तेरे लिये जहाँ सब कुछ,
होना भी जरूरी है।
कुछ आगे के लिये भी,
सामान किये जा ।।1।।
ओ३म् नाम लिए जा, तू दान…..

आत्मा को खुली छोड़,
क्योंकि ये आजाद है।
मन विषयों से रोक तू,
ये बड़ा नामुराद है।
हर बात में इसको,
तू प्रधान किये जा।।1।।
ओ३म् नाम लिए जा, तू दान…..

तेली का वो बैल चाहे,
आठों याम काम कर,
दो घड़ी आराम से तू,
याद कर प्रभु नाम कर।
इतना तू अपने आप पर,
अहसान किये जा।।3।।
ओ३म् नाम लिए जा, तू दान……

जीवन की तेरी रस्सी के जो,
बल थे सारे जल चुके,
जो तीर थे तरकस जवानी के,
वो सारे जल चुके।
यूँ ही ना टेढ़ी कमर को,
कमान किये जा।।4।।
ओ३म् नाम लिए जा, तू दान…..

गर्दन झुकाये ढूंढ़ता
जवानी को हँस हाल में,
कीमत न समझी’ नत्थासिंह’
जीवन के अस्सी साल में।
अब भी इस मानव चोले का,
सम्मान किये जा।।5।।
ओ३म् नाम लिए जा, तू दान……