जीवन खतम हुआ तो, जीने का ढंग आया।

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वैराग्य

जीवन खतम हुआ तो,
जीने का ढंग आया।
जब शमां बुझ गई तो,
महफिल में रंग आया।।


गाड़ी निकल गई तब,
घर से चला मुसाफिर।
मायूस हाथ मलते,
वापस बैरंग आया।।
जीवन खतम हुआ तो जीने …….

मन की मशीनरी ने,
तब ठीक चलना सीखा।
जब बूढ़े तन के हर इक,
पुर्जे ने जंग खाया।।
जीवन खतम हुआ तो जीने…….

फुरसत के वक्त में ना,
सिमरन का वक्त माँगा।
उस वक्त वक्त माँगा,
जब वक्त तंग आया।।
जीवन खतम हुआ तो जीने…….

आयु ने ‘नत्थासिंह’ जब,
हथियार फेंक डाले।
यमराज फौज ले के,
करने को जंग आया।।
जीवन खतम हुआ तो जीने………..