भक्ति
ये जीवन तुम्हारा, तुम्हीं को है अर्पण।
लगा दो किनारे, इसे मेरे भगवन् ।।
लगा दो किनारे इसे मेरे भगवन्…..।।1।।
हो करुणा के सागर, दया के हो दाता।
तुम्हीं जग के पालक, तुम्हीं हो विधाता ।।
यह सोया है मानव इसे तुम जगा दो।
ये जीवन तुम्हारा, तुम्हीं को है अर्पण।।
लगा दो किनारे इसे मेरे भगवन्…..।।2।।
दरस दो, बड़ा होगा अहसां तुम्हारा।
भटकता ही रहता है, मनवा हमारा।।
इसे वश में करने की शक्ति बता दो।।
ये जीवन तुम्हारा, तुम्हीं को है अर्पण।।
लगा दो किनारे इसे मेरे भगवन्…..।।5।।
तुम्हारे भरोसे है जीवन की नैय्या।
लगा दो इसे पार, मेरे खिवैया।
कहीं डूब जाये न, इसको बचा दो।।
ये जीवन तुम्हारा, तुम्हीं को है अर्पण।।
लगा दो किनारे इसे मेरे भगवन्…..।।4।।
दरस दो, बड़ा होगा अहसां तुम्हारा।
भटकता ही रहता है, मनवा हमारा।।
इसे वश में करने की शक्ति बता दो।।
ये जीवन तुम्हारा, तुम्हीं को है अर्पण।।
लगा दो किनारे इसे मेरे भगवन्…..।।5।।










