तुम्हीं मेरे बन्धु, सखा तुम्हीं हो

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आस्था

तुम्हीं मेरे बन्धु, सखा तुम्हीं हो,
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो,
तुम्हीं मेरे रक्षक, तुम्हीं मेरे पालक,
तुम्हीं इष्ट मेरे तुम्हीं देवता हो।।
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो।

तुम्हें छोड़ किसकी शरण में मैं जाऊँ,
है सब कुछ तेरा क्या तुम पर चढ़ाऊँ।
तुम्हीं मेरी विद्या तुम्हीं मेरी दौलत,
मैं क्या-क्या बताऊँ कि तुम मेरे क्या हो।
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो।

तुम्हीं ने बनाए शशि भानु तारे,
अगन और गगन जल हवा भूमि सारे।
तुम्हीं ने रचा यह संसार सारा,
अजब कारीगर हो अजब रचयिता हो ।।
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो।

जमाना तुझे ढूंढ़ता फिर रहा है,
न पाया किसी को छुपा तू कहाँ है।
पता मिल रहा है पत्ते-पत्ते से तेरा,
गलत है जो कहते हैं तुम लापता हो।
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो।

अजब तेरी लीला अजब तेरी माया,
सभी से अलग है सभी में समाया।
सत्ता से तेरी मुकर जाएँ कैसे?
की हर सूं ‘वीरेन्द्र’ रहे जगमगा रहे जगमगा हो।
तुम्हीं मेरी माता, तुम्हीं पिता हो।