जिस नर में आत्म शक्ति है, वह शीश झुकाना क्या जाने

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आस्था

जिस नर में आत्म शक्ति है,
वह शीश झुकाना क्या जाने।
जिस दिल में ईश्वर भक्ति है,
वह पाप कमाना क्या जाने।।

मन मन्दिर में भगवान् बसा,
जो उसकी पूजा करता है।
पत्थर के देवता पर जाकर,
वह फूल चढ़ाना क्या जाने।।

माँ बाप की सेवा करता जो,
और उनके दुःखों को हरता जो।
ईश्वर का है विश्वास जिसे,
दुख में घबराना क्या जाने।।

जो खेला है तलवारों से
और अग्नि के अंगारों से।
रणभूमि में जाकर आगे,
वह कदम हटाना क्या जाने।।

जिस नर में आत्म शक्ति है,
वह शीश झुकाना क्या जाने।
जिस दिल में ईश्वर भक्ति है,
वह पाप कमाना क्या जाने।।

जिसने रसना और वासना पर नियन्त्रण कर लिया वही योगी है।