आर्य समाज मन्दिर, धामावाला, देहरादून
144वाँ वार्षिक महोत्सव
दिनांक 29, 30 नवम्बर एवं 01 दिसम्बर 2024
निमन्त्रण पत्र
ओ३म् युक्तेन मनसा वयं देवस्य सवितुः सवे। स्वगर्याय शक्तया।। (यजु० ११/२//)
दिव्य गुणों के भण्डार सर्वोत्पादक प्रभु के उत्पन्न हुए संसार में हम योगयुक्त मन से, एकाग्र मन से, स्थिर मन से, सुखविशेष की प्राप्ति के लिए अपने सामर्थ्य से उस ब्रह्मज्योति को धारण करें।
आर्य समाज के संस्थापक, युगप्रवर्तक एवं योगिराज वेदोद्धारक महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी (1824-1883)
के द्विशताब्दी जन्मोत्सव एवं आर्य समाज की स्थापना के 150 वें वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम
मान्यवर,
आप सभी आत्मीय जनों के आत्मीय सहयोग, स्नेह एवं मार्गदर्शन के आधार पर आर्य समाज, धामावाला, देहरादून महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के संकल्प” कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” अर्थात् “विश्व को आर्य बनाते चलो” और ” वेदों की ओर लौट चलो” तथा अवैदिक मान्यताओं, कुरीतियों व अन्धविश्वास के विरुद्ध उद्देश्यों व सिद्धांतों के अनुरूप गत. 145 वर्षों से कार्यरत है। आपको यह जान कर प्रसन्नता होगी कि महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के द्विशताब्दी जन्मोत्सव एवं आर्य समाज की स्थापना के 150 वें वर्ष के उपलक्ष्य में आर्य समाज मन्दिर धामावाला का 144 वाँ वार्षिक महोत्सव आपके सहयोग व आशीर्वाद से 29, 30, नवम्बर एवं 1 दिसम्बर 2024 की तिथियों में दिन शुक्रवार, शनिवार एवं रविवार को बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर आप आर्य जगत के सुप्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ता तथा सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक द्वारा विद्वत्तापूर्ण प्रचचनों व मधुर भजनों के माध्यम से वेदों का संदेश प्राप्त कर सकेंगे। आपसे सादर प्रार्थना है कि सररिवार एवं इष्ट मित्रों सहित कार्यक्रमानुसार उपस्थित होकर वेद प्रवचनों व भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक ताभ उठायें।
यज्ञ ब्रह्माः श्री विद्यापति शास्त्री जी आर्य समाज मन्दिर धामावाला
सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक : पं. उपेन्द्र आर्य जी चन्डीगढ़
आर्य जगत के सुप्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय वैदिक प्रवक्ताः
आचार्य सत्यजित् आर्य जी, वानप्रस्थ साधक आश्रम, रोजड़, गुजरात आचार्य डॉ. धनन्जय आर्य जी, गुरूकुल, पौंधा

कार्यक्रम
स्थानः आर्य समाज मन्दिर धामावाला, देहरादून
शुक्रवार, दिनांक 29 नवम्बर 2024
प्रथम दिवस-प्रथम सत्रः विषयः वर्तमान परिवेश में वैदिक संस्कृक्ति का महत्व
यज्ञ- प्रात: 8.30 से 9.15 बजे तक
ध्वजारोहण- प्रातः 9.15 से 9.45 बजे तक
जलपान- प्रातः 9.45 से 10.15 बजे तक
भजन- प्रातः 10-15 से 11.15 बजे तक
प्रवचन एवं शंका समाधान- प्रातः 11-15 से 12.30 बजे तक
भोजन – ऋषि लंगर अपराह्न 12-30 से 2.30 बजे तक
प्रथम दिवस-द्वितीय सत्रः ईश्वर प्राप्ति के साधन
भजन सायं 2.30 से 3.30 बजे तक
प्रवचन एवं शंका समाधान सायं 3.30 से 4.30 बजे तक
शांति पाठ एवं ऋषि प्रसाद
शनिवार, दिनांक 30 नवम्बर 2024
द्वितीय दिवस-प्रथम सत्रः विषयः राष्ट्र निर्माण में मातृ शक्ति एवं युवा शक्ति की भूमिका
यज्ञ प्रातः 8.30 से 9.15 बजे तक
जलपान प्रातः 9.15 से 9.45 बजे तक
भजन प्रातः 9.45 से 11.10 बजे तक
प्रवचन एवं शंका समाधान प्रातः 11-10 से 12.30 बजे तक
भोजन – ऋषि लंगर अपराह्न 12.30 से 2.30 बजे तक

द्वितीय दिवस-द्वितीय सत्रः आत्मा का अस्तित्व
भजन सायं 2.30 से 3.30 बजे तक
प्रवचन प्रातः 3.30 से 4.30 बजे तक
शांति पाठ एवं ऋषि प्रसाद
रविवार, दिनांक 01 दिसम्बर 2024
तृतीय दिवस-समापन सत्रः विषयः धर्म और कर्तव्य
यज्ञ प्रातः 8.30 से 9.15 बजे तक
जलपान प्रातः 9.15 से 9.45 बजे तक
ब्रह्मचारियों द्वारा वेद पाठ प्रातः 9.45 से 10.15 बजे तक
भजन प्रातः 10.15 से 11.15 बजे तक
प्रवचन एवं शंका समाधान प्रात: 11.15 से 12.30 बजे तक
अभिनन्दन समारोह अपराह्न 12.30 से 1.15 बजे तक
धन्यवाद ज्ञापन अपराह्न 1.15 से 1.30 बजे तक
शांति पाठ एवं ऋषि लंगर
मुख्य अतिथि : डॉ. अनिल प्रकाश जोशी जी
(संस्थापक हिमालयन पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संगठन (HESCO)
विशिष्ठ अतिथिगण
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव जी, श्री चन्द्र प्रकाश जी, श्री दयानन्द तिवारी जी, श्री ज्ञान चन्द गुप्ता जी, श्री संदीप यादव जी, डॉ. विनय विद्यालंकार जी, श्री आनन्द प्रकाश अग्रवाल जी, श्री पृथ्वी राज आर्य जी, श्री सुधीर कुमार माटा जी, श्री ओम प्रकाश महेंदू जी, श्री चन्द्रगुप्त विक्रम जी, श्रीमती नन्दिनी गुप्ता जी, श्रीमती सोनिका वालिया जी, श्री मनमोहन जी, श्री शंकर सिंह क्षेत्री जी, श्री महेन्द्र आहूजा जी, श्रीमती संगीता आर्या जी, श्री सत्यपाल आनन्द जी, श्री पंथदेव गुप्ता जी, श्री चंद्रपाल सिंह जी, डॉ. नवदीप कुमार जी, डॉ. श्रीमती सुखदा सोलंकी जी, सुश्री डॉ. सन्तोष आर्या जी, श्रीमती संतोष गोयल जी, श्री हरिमोहन रस्तोगी जी, श्री प्रमोद शेखरी जी, योगाचार्य डॉ. सत्येन्द्र सिंह जी, श्री रोहित आर्य जी, श्री राम बाबू सैनी जी, श्री विनय कुमार सैनी जी, श्री गंभीर सिंह सिंधवाल जी, श्री जितेन्द्र सिंह नेगी जी, श्री नागेंद्र सिंह तोमर जी, श्री दीपक कुमार जी, योगाचार्य श्री सुधीर वर्मा जी, श्री विजय आर्य जी, श्रीमती सुमन नांगिया जी, श्री राजीव नांगिया जी, श्री नरेन्द्र कुमार वर्मा जी, श्री दीपक बंसल जी, श्री रविन्द्र बहुगुणा जी, श्री टीका राम डबराल जी।

आर्य समाज मन्दिर धामावाला का संक्षिप्त परिचय एवं इतिहास
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती ने मानव मात्र कल्याणार्थ 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 को सर्वप्रथम मुम्बई में की और सत्यसनातन वैदिक धर्म के प्रकाश एवं मानव कल्याण की भावना से सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादि भाष्य भूमिका, संस्कार विधि आदि अनेक ग्रंथों का प्रणयन किया। आर्य समाज मन्दिर धामावाला की स्थापना का बीज महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के प्रथम देहरादून प्रवास के दौरान ही बोया गया था। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी हरिद्वार से कुम्भ-प्रचार का कार्य समाप्त करके प्रथम बार 14 अप्रैल 1879 को देहरादून में पधारे और 30 अप्रैल 1879 तक रहे। उनकी पावन प्रेरणा से उनके जाने के पश्चात सत्य और धर्म के प्रति अटूट आस्था रखने वाले देहरादून नगरवासियों द्वारा 29 जून 1879 को आर्य समाज की विधिवत स्थापना की गई। गत 145 वर्षों से आर्य समाज मन्दिर धामावाला महर्षि के उद्देश्यों को पूर्ण करने के लिए वैदिक सिद्धांतों के आधार पर कार्य करने में अग्रसर है।
मुख्य गतिविधियां
- दैनिक यज्ञः प्रातः 8.00 बजे से 8.30 बजे तक (ग्रीष्म ऋतु) और प्रातः 8.30 बजे से 9.00 बजे तक (शरद ऋतु)
- साप्ताहिक यज्ञ एवं सत्संगः प्रति रविवार प्रातः 8.00 बजे से 10.00 बजे तक (ग्रीष्म ऋतु) और प्रातः 8.30 बजे से 10.30 बजे तक (शरद ऋतु), यज्ञ, भजन और विद्वानों द्वारा वेद विषय पर उपदेश और व्याख्यान।
- वैदिक संस्कारः आर्य समाज के पुरोहित/आचार्य द्वारा विभिन्न संस्कार जैसे विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश, नामकरण, शुद्धिकरण आदि।
- आर्य समाज धामावाला द्वारा संचालित श्री श्रद्धानन्द बाल वनिता आश्रम, तिलक रोड, देहरादून में 60-70 बालक/बालिकाओं की व्यवस्था।
- राम प्यारी आर्य कन्या पाठशाला इण्टर कॉलेज, खुड़बुड़ा देहरादून का संचालन ।
- वेद प्रचार सप्ताहः पारिवारिक सत्संगों का आयोजन।
- वार्षिक उत्सव-प्रसिद्ध भजनोपदेशक एवं विद्वानों के प्रवचन।
- आर्य पर्व-आर्य समाज स्थापना दिवस, ऋषि बोध दिवस, नवसंवत्सर का आयोजन।
- राष्ट्रीय पर्व- स्वाधीनता एवं गणतंत्र दिवसः शहीदी दिवसों का आयोजन।
- देश के ज्वलंत विषयों पर जागरूकता लाने के उद्देश्य से चर्चा व गोष्ठी का आयोजन।
- अनाथ एवं निर्धन परिवारों के विवाहों का आयोजन।
- योग कक्षाओं का आयोजन।
- जन्मदिवस व विवाह वर्षगांठ पर हवन यज्ञ की सुविधा।
- पुस्तकालय वैदिक साहित्य।
- विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों की हिन्दी भाषण प्रतियोगिता का आयोजन।










