कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया।

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ईश महिमा

कण-कण में जो रमा है, हर दिल में है समाया।
उसकी उपासना ही कर्त्तव्य है बताया।।

दिल सोचता है खुद वो, कितना महान होगा।
इतना महान जिसने, संसार है बनाया।।
कण-कण में जो रमा है,…….

देखो ये तन के पुर्जे, करते हैं काम कैसे।
जोड़ों के बीच कोई, कब्जा नहीं लगाया।।
कण-कण में जो रमा है………

इक पल में रोशनी से, सारा जहान चमका।
सूरज का एक दीपक, आकाश में जलाया।।
कण-कण में जो रमा है………..

अब तक यह गोल धरती, चक्कर लगा रही है।
फिरकी बना के कैसी, तरकीब से घुमाया।।
कण-कण में जो रमा है……..

कठपुतलियों का हम ने, देखो अजब तमाशा।
छुप कर किसी ने सब को, संकेत से नचाया।।
कण-कण में जो रमा है……

हर वक्त बन के साथी, रहता है साथ सब के।
नादान ‘पथिक’ उसको, तू जानने ना पाया।।
कण-कण में जो रमा है…….