करो न कभी दौलत का झूठा अभिमान

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करो न कभी दौलत का झूठा अभिमान

करो न कभी दौलत का झूठा अभिमान

करो न कभी दौलत का झूठा अभिमान।
कुचल के रख दे अभिमानी को।
ईश महा-बलवान।।टेक।

दौलत से भोजन मिल जाए और बहुत सी चीजें।
भूख का मिलना महा कठिन है करो लाख तरकीबें।
दौलत से दवा मिल जाए, पर सेहत कहाँ से आए।
इस बात पे दीजे ध्यान।। करो न कभी…..

दौलत बेटा दे सकती पर पुत्र नहीं दे पाए।
पुत्र है वो जो राम समान पिता का हुक्म बजाए।
चाहे दुःख की बिजली टूटे पर धर्म कभी न छूटे।
आयें लाखों तूफान।। करो न कभी…..

तुमको दौलत से मिल सकती, ऐनक खूब निराली।
लेकिन कभी न मिल सकती आँख रोशनी वाली।
चाहे ढूँढ़ो दुनिया भर में, न मिलेगी किसी भी नगर में।
मैं करता हूँ एलान।। करो न कभी….

दौलत देकर कार कोठियों के बन जाओ मालिक।
लेकिन शान्ति जैसी वस्तु का है पाना मुश्किल।
औरत भी मिले दौलत से, पर पत्नी मिले किस्मत से।
सम्मुख लाखों प्रमाण।। करो न कभी….