अगर तू कहीं है
अगर तू कहीं है, तो सूरत दिखा दे।
ये मन्दिर व मस्जिद के झगड़े मिटा दे।।
जमाना तुझे ढूँढता फिर रहा है।
ओ पर्दानशीं रुख से पर्दा उठा दे।।
बनाकर ये बाजीगरों की दुनिया।
छिपा है कहाँ दुनिया वाले बता दे ।।
हमें अपनी हस्ती से आगाह कर दे।
नहीं तो हमारी भी हस्ती मिटा दे ।।
सुना है तू बिगड़ी बनाता है सबकी।
बना दे मुसाफिर की बिगड़ी बना दे।।
























