आकाश सूर्य चन्द्र में
आकाश, सूर्य, चन्द्र, में,
उडुगन में ओ३म् है।
जल में, पवन में, दामिनी में,
घन में ओ३म् है ।।
गिरि, कन्दरा में, वाटिका में,
वन में ओ३म् है।
लोचन में ओ३म्, तन में ओ३म्,
मन में ओ३म् है।।
व्यापक है अखिल विश्व में
विस्तार ओ३म् का।
सब मिल के नारी-नर करो
उच्चार ओ३म् का।। 1 ।।
ध्रुव ने बड़े ही प्रेम से
इस नाम को ध्याया।
प्रह्लाद ने इसी से
अमित नेह लगाया।।
क्रोधित हो असुर ने
उसे बहु भाँति सताया।
भय, अग्नि व पर्वत से
गिराने का दिखाया ।।
त्यागा न किन्तु भक्त ने
आधार ओ३म् का।
सब मिल के नारी-नर करो
उच्चार ओ३म् का ।।2।।
इस नाम के प्रताप
दयानंद हुए सबल ।
वैदिक विवेक सत्य के
साँचे में गए ढल ।।
























