इक ओ३म् नाम जग में
इक ओ३म् नाम जग में है, सर्व सुखों का सार।
जीवन की नैया का, बस वही एक पतवार ।।
वह है सारे जग का स्वामी
घट घट वासी अन्तर्यामी
उसको छोड़ किसे मैं ध्याउँ
और कौन से प्रीति लगाऊँ
देख लिया है मैंने सारा मतलब का संसार।
इक ओ३म् नाम जग में है सर्व सुखों का सार ।।
कण-कण में प्रभु आप समाये
पास रहे पर दीख न पाये
वही न्यायकारी है ऐसा
जैसी करनी फल दे वैसा
महिमा अपरम्पार गये ऋषि, मुनि विज्ञानी हार।
इक ओ३म् नाम जग में, है सर्व सुखों का सार ।।
बिगड़ी तुम्हीं बनाने वाले
संकट शूल मिटाने वाले
टुक ज्ञान चक्षु खोल के
तू देख तो सही।
जिसको तू ढूँढ़ता
वो सदा तेरे पास है।।
कुछ तो समय निकाल आत्मशुद्धि के लिए।
नर जन्म का उद्देश्य न केवल विलास है ।।
आनंद स्रोत को न पा सकेगा तब तलक ।
जब तलक तू ‘प्रकाश’ इंद्रियों का दास है।।
























