ओ३म् नाम लिये जा

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ओ३म् नाम लिये जा

ओ३म् नाम लिये जा,
कुछ काम किये जा।
आने वाली मुश्किलें
आसान किये जा।।
खाना पीना पहनना
सोना तो जरूरी है।
तेरे लिए सब कुछ मानव
होना तो जरूरी है।
कुछ वहां के लिए भी
सामान लिये जा।।
ओ३म् नाम…

आत्मा को खुला छोड़
क्योंकि ये आजाद है।
मन को तू मार ले ये
बड़ा नामुराद है।।
हर बात में न इसको
प्रधान किये जा ।।
ओ३म् नाम…

कोल्हू के ओ बैल चाहे
आठों पहर काम कर।
पर दो घड़ी बैठकर चिंतन
सुबह शाम कर।
कुछ तो अपने आप पर
ऐहसान किये जा।।
ओ३म् नाम…

जीवन की रस्सी जो थे
वे तो सारे जल चुके।
जवानी के तीर जो थे
वे तो सारे चल बसे।
यूं ही टेढ़ी कमर को
कमान किये जा।।
ओ३म् नाम..

जवानी को ढूंढता उस
बुढ़ापे बेहाल में।
कीमत न डाली तूने
जीवन के असली सांस में।
अब तो मानव चोले को
सम्मान दिये जा।।
ओ३म् नाम…

जग में जननी जब बाल भई,
तब एक रहि सुधि भोजन की।
तन में तरूणाई जबै प्रकटी,
तब प्रीति बढ़ी तरुणी तन की।
तन वृद्ध भयो धन की तृष्णा,
सब लोग कहे सनकी सनकी।
सुख शान्ति नाहि मिल्यो कबहुं,
रही अन्त समय मन में मन की।

पेट का बंधन वित्तैषणा।
पैर का बंधन पुत्रैषणा।
गले का बंधन लोकैषणा।।