माँ बाप का दिल ना, दुःखाना कभी।

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माँ बाप का दिल ना, दुःखाना कभी।

तर्ज – हीर जानेवाली (बुन्दू मीर)

माँ बाप का दिल ना, दुःखाना कभी।
बुढ़ापे में इनको ना, सताना कभी ।।

करेगा जो इनकी सेवा,
खुशियाँ वो पायेगा आशीर्वाद
लेकर इनका, मोक्ष धाम जायेगा
ना इनको सचिन ‘सारंग’,
बहकाना कभी बुढ़ापे में इनको……

विदा होके दुनियाँ से,
जब चले जायेंगे लौट के
शक्ल ना तुमको,
फिर ये दिखायेंगे आखें
ना बन्दे इनको,
दिखाना कभी बुढ़ापे में इनको…..

अहसान हम इनके,
भुला ना सकेंगे ऋण
इनके इतने हैं, चुका ना सकेंगे
आसुओं को इनके ना,
बहाना कभी बुढ़ापे में इनको……

लेकर तुझे बाहों में,
माँ ने झुलाया सो गयी
खुद गीले में, तुझे ना सुलाया
निगाहें ना इनसे बन्दे,
चुराना कभी बुढ़ापे में इनको……