क्यूँ भूलता तेरी मंजिल कहाँ रे?
जीवन को दोए तू पहुँचा कहाँ रे ॥
क्यूँ रहके जगत में करे ना भलाई ?
कभी पुण्य कर्मों की, की ना कमाई
विषय और विकारों में मति भरमाई
तू खुद से गया है बता क्यूँ छला रे? ॥ जीवन को…
है मक्सद अगर अपना पेट ही भरना
बता तुझको मानुष जन्म क्या है करना
क्या तुझको ना पशुओं से बेहतर है बनना
क्यूँ हीरा जन्म कौड़ियों का हुआ रे? ॥ जीवन को…
ये चोला जो पाया परीक्षा है तेरी
कर्म ही करेंगे समीक्षा ये तेरी
तो अब सोच ले तू क्या इच्छा है तेरी
है अब भी समय शेष जीवन बचा रे ॥ जीवन को…
अगर तू ना जाने के मंजिल कहाँ है
जहाँ वेद कहते समझ ले वहाँ है
इन वेदों की शिक्षा से जीवन बना है
इसी से ही जीवन लगेगा किनारे ॥ जीवन को…
तर्ज : दिल ढूँढता है सहारे सहारे










