प्रभु बिन सूने हृदय हमारे
जन्म सफल क्यूँ हुए ना हमारे ॥
श्वास जो पाए जगत में आ के
रह गए विषयों में पगला के
खेल जीवन के सब गए हारे ॥ प्रभु बिन…
दोष हवा का मन हुआ साथी
तेल रहा ना बुझ गई बाती
दीप गुणों का व्यर्थ बुझा रे ॥ प्रभु बिन…
पाप क्यूँ, भाए, पुण्य ना भाए
चोट लगे मन करे हाय हाय !
मति भरमाई क्यो मनवा रे ॥ प्रभु बिन…
जल में ही रह के रह गए प्यासे
ज्ञान बिना क्या कर्म कमाते
नैया जीवन की खड़ी मँझधारे ॥ प्रभु बिन…
याद प्रभु की क्यों नहीं आती
दर्शन को क्यों नहीं तरसाती
प्रीत का पंछी उड़ ना सका रे ॥ प्रभु बिन…
बन्धु पिता वो, वो ही साथी
भेद करे ना पूछे ना जाति
शरण जो आए उन भक्तों को तारे ॥ प्रभु बिन…
धर्म कर्म की राह सुझा दे
वेदमार्ग पर हम को चला दे
सृष्टि के ऋत सत्य तेरे सहारे ॥ प्रभु बिन…
(मति) बुद्धि (ऋत) सृष्टि के नियम
तर्जु: तेरे बिन सूने नैन हमारे










