मन के मन्दिर में प्रभु दरस दिखाओ तो सही

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मन के मन्दिर में प्रभु दरस दिखाओ तो सही

मेरे अंतः करण की प्यास बुझाओं तो सही ॥ मन के..

जग में उलझा ही रहा पा न सका तेरी शरण

ज्ञान किरणों से अमर ज्योति जलाओ तो सही ॥ मन के..

हवा के दोष पे कर्मों के दीप जलते रहे

मेरे पापों की हवा मन से हटाओ तो सही ॥ मन के…

है फैसा चंचल मन मेरा गर्दिशों में प्रभु

इसे स्थिर करने की तरकीब बताओ तो सही ॥ मन के…

क्या करूँ सूझे ना कुछ तेरे सिवा मेरे प्रभु!

दीन वत्सल हो दया दृष्टि घुमाओ तो सही ॥ मन के…

चक्र में घूम चुका अब मैं पुकारूँ तुझको

मेरी आत्मा में अमर प्रेम बहाओ तो सही ॥ मन के…

हे मेरे जातवेद दिव्य उपचरित प्रभुजी

मेरे जीवन का ध्येय पूर्ण कराओ तो सही ॥ मन के…

(जातवेद) सर्वज्ञ (उपभरित) उपासना लायक, लक्षण से जाना हुआ।

तर्ज ना हँसो हम पे जमाने के हैं