तेरा आज यह व्याख्यान कुछ भी ना रखता स्थान

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तेरा आज यह व्याख्यान कुछ भी ना रखता स्थान

तेरा आज यह व्याख्यान,
कुछ भी ना रखता स्थान,
कृष्ण ग्वाले।

हत्यारे, तैने सारे सुत,
हमारे मरवा डाले।। टेक
इतना भारी नर संहार,
तू ना चाहता तो ना होता।
नष्ट मेरा सारा परिवार,
तू ना चाहता तो ना होता।
तैने बर्क करके अन्ड बन्ड,
युद्ध की आग करी प्रचण्ड।
ओ मन के काले, हत्यारे तैने सारे…..

जिसका सारा कुटुम्ब खपा दिया,
उसको ही उपदेश करै।
भूली बातें याद दिलाकर,
क्लेश में और क्लेश करें।।

तेरा एक एक बोल,
छुरी बन करके रहा है छोल।
जिगर के छाले, हत्यारे तैंने सारे.. 12

एक भी जिन्दा ना छोड़ा
क्या वह थे सारे ही दोषी।
मेरे प्रश्न का उत्तर दे चुप
क्यों यह कैसी खामोशी ।।.

यदि उत्तर नहीं पास,
है तो करके बन्द बकवास।
तू अपनी राह ले, हत्यारे तैने सारे…

पुत्रों की लगी चोट हृदय में,
जीवन भर ना जख्म भरें।
सब उपदेश भूल जायेगा,
जिस दिन तेरा कुटुम्ब मरें।।

सुन कर हो गया मौन,
प्रेमी बुढ़ापे में कौन।
जो हमें सम्भाले,
हत्यारे तैने सारे. 14