धन्य वेदों वाले ऋषि जग में तेरी जय जयकार है।।
धन्य वेदों वाले ऋषि,
जग में तेरी जय जयकार है।। टेक ।।.
तपस्वी ऋषि योगी ब्रह्मचारी,
लेखक वक्ता सिद्धियां सारी,
जग से निराले ऋषि,
कोई ना तेरे हुणहार है।।1।।
जो थे तेरे कट्टर विरोधी,
नम्र हुये अब आ गई सोधी,
तेरे हवाले ऋषि,
शरणागत संसार है।। 2 ||
हम जीवन से ऊब रहे थे,
दुख सागर में डूब रहे थे,
आकर सम्भाले ऋषि,
हम पे तेरे ऋण का भार है।।3।।
वेद विरुद्ध मत चोर उचक्के,
घर में घुसे थे देकर धक्के,
बाहर निकाले ऋषि,
प्रेमी तेरा यह चमत्कार है।।4।।










