बिना पुरुषार्थ के विश्वास करें

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बिना पुरुषार्थ के विश्वास करें

बिना पुरुषार्थ के विश्वास करें,
उद्धार न होगा।
यह बेड़ा धार से टकराये बिन,
उस पार न होगा।।
जो निर्धन होके भी,
परिश्रम नहीं करते हैं दुनिया में।
सपने में भी सहायक,
उनका यह संसार न होगा।। 1।।

धनी जो दान दे करके
नहीं उपकार करते हैं।
ऐसे धनवानों का जग में
कहीं सत्कार न होगा।। 2।।

लगाकर वर्क यो बैठे हैं,
गोबर की मिठाई पर।
यह पर्दाफाश हो एक दिन,
कोई खरीदार न होगा ।।3 ||

ए ‘प्रेमी’ दुनिया वालों को
तो धोखा दे भी सकते हो।
प्रभु के न्याय में धोखा,
यह मददगार न होगा।।4।।

प्रेमी छन्द

जो निर्धन श्रम न करे,
धनी करे नहीं दान।
भारी पत्थर बांध कर,
फैको जल दरम्यान ।।

शेर

रूह ने फिर कर न देखा,
आह अपने जिस्म को।
गैर हो जाते हैं अपने आंख
फिर जाने के बाद।।