मेरी वाणी है विज्ञानी
मेरी वाणी है विज्ञानी,
मेरा मन यज्ञ महानी।
आंखे प्राण अथर्व गढ़े हैं,
प्राणों में है साम रवानी ।। टेक ।।
चारों वेद गढ़ा हूं यह मैं,
चारों वेद गढ़ा हूं।
समकक्षों में असम हूं फिर भी
घरती पर ही खड़ा हूं।
पीता हरपल ज्ञान पानी,
कर्म में ना कोई नादानी ।। १ ।।
सच पथ पर है चलना मेरा,
ऋत पथ पर है चलना।
जीवन में जो ढलना है वो,
मोक्ष अमर पद चढ़ना।
जनम मरण है रीत सुहानी,
आत्मा में परमात्म की वाणी ।। २ ।।










