जननी बनकर प्रेम से छाती से लो हमको लगा
जननी बनकर प्रेम से
छाती से लो हमको लगा,
ज्वालामुखी ! हम नारियों की दो
सभी चिन्ता मिटा ।। कहते-२
उन सभी के लाल चेहरे हो गये,
आकाश के भी उस समय
रोमाँच सहसा हो गये।।
बच्चों को लेकर गोद में
अग्नि की ज्वाला में गिरीं,
बारी-बारी से सभी इक
दूसरी पर जा गिरीं ।।
है नहीं अब पद्मिनी पर
रास्ता दिखला गई,
पति-लोक में जाने की
रीति देवियाँ बतला गई ।।










