समय कैसा सुहाया है

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समय कैसा सुहाया है

समय कैसा सुहाया है,
हर्ष इस घर में छाया है।
ऋचायें वेद की गाकर
यज्ञ सुन्दर रचाया है।।
किया निर्माण इस घर का,
ईश के गीत-गा-गाकर।

बसेंगे आज से गृह में,
अतः उत्सव मनाया है।।
समय० यही है कामना
सबकी प्रभु इस सदन के वासी ।

सदा सुख से सभी जीवें,
न होवे कष्ट काया है।।
समय० दुधारी गौवें हों घर में,
बैले रथ अश्व हाथी हों।
मनायें हर्ष सब बालक,
धर्म धन हो सवाया है।। समय०

रहे भरपूर इस घर में
सदा धन धान्य सत् श्रद्धा।
सदा ध्याये मनायें देव
जो वेदों में गाया है।। समय०