भोली मेरी बहिनों धर्म सब भूलि गई।
भोली मेरी बहिनों धर्म
सब भूलि गई।
घर में तो तुम घूंघट
काढ़ौ किनहुँ से न बोलौ।
बाजारों में मुखड़ा खोले
गीत गावती डोलौ।
धर्म१ धर्म पतिव्रत भूलो
दिल से छोड़ी लज्जा सारी।
पर पुरुषों के संग अनाड़ी
गाली गाती सारी।
धर्मर घर में तो अपने
पति से तुम नित की रार मचाओ।
ढोंगी सन्त फकीरों के
तुम दर्शन करने जाओ।
धर्म३ गण्डे और ताबीज
कराके पैसे रोज ठगाओ।
ईश्वर का विश्वास छोड़
के भूत पूजने जाओ।
धर्म४ ‘अभय’ धर्म नारी
का जग में पति की सेवा करना।
ईश्वर का विश्वास छोड़
के इधर उधर मत फिरना। धर्म५










