जिस दिल में ईश्वर भक्ति है
जिस दिल में ईश्वर भक्ति है,
वह पाप कमाना क्या जानें।
जिस नर में आत्मिक शक्ति है,
अन्याय से झुकना क्या जानें ।।
माँ बाप की सेवा करते हैं,
उनके दुःखों को हरते हैं।
वह मथुरा, काशी, हरिद्वार,
वृन्दावन जाना क्या जानें ।।
दो काल करें सन्ध्या व हवन,
नित सत्संग में जो जाते हैं।
भगवान् का है विश्वास जिन्हें,
दुःख में घबराना क्या जानें ।।
जो खेले हैं तलवारों से और
अग्नि के अंगारों से।
रण भूमि में जाके पीछे
वह कदम हटाना क्या जानें ।।
हो कर्मवीर और धर्मवीर
वेदों का पढ़ने वाला हो।
वह निर्बल दुखिया बच्चों
पर तलवार चलाना क्या जानें ।।
मन मन्दिर में भगवान् बसा,
जो उसकी पूजा करते हैं।
मन्दिर के देवता पर जाकर
वह फूल चढ़ाना क्या जानें ।।
जिनका अच्छा आचार नहीं
और धर्म से जिनको प्यार नहीं।
जिनका सच्चा व्यवहार नहीं
‘नन्दलाल’ का गाना क्या जानें ।।










