दाँत जब निकलें तभी मुण्डन कराना चाहिये।
दाँत जब निकलें तभी
मुण्डन कराना चाहिये।
नन्हे से बालक को रोगों से
बचाना चाहिये ।।
देह पति सेना का सेनापति
होता है शिर।
इसलिये बलवान् और
पुख्ता बनाना चाहिये ।।
पुरूष रूपी वृक्ष की यों
जड़ भी कहते हैं इसे।
रोग रूपी जन्तु दीमक
से बचाना चाहिये ।।
स्वास्थ्य पाने के लिये
यह भी जरूरी है सदा।
सर्व रोगों से यथोचित्
शिर बचाना चाहिये ।।
दाँत बनने में सहायक हैं
ये नस और नाड़ियाँ।
इनका सारे देह से
सम्बन्ध जताना चाहिये।।
सावधानी से कटाकर
बाल छोटे लाल के ।
सिर पर ताजी घी मलाई
भी लगाना चाहिये ।।
आँख और सिर की तुम्हें
रक्षा यदि स्वीकार है।
सिर पर ठण्डक आँख
में काजल लगाना चाहिए।।










