त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव माता च पिता त्वमेव
त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव
त्वमेव सर्वं मम देव देव॥
सदा सदा के साथी मेरे
तेरी जय जयकार करूँ
हर पल सिमरूँ नाम तिहारा
तेरा ही गुणगान करूँ
चोरी निन्दा करूँ न दाता
जो तू दे स्वीकार करूँ
तप संयम का जीवन राखूँ
भव सागर से पार करूँ
हे नाथ !!! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो
आया मैं शरण तेरी
भक्ति के भाव भर दो
हे नाथ !!! दयालु हो
तेरे रँग में रँग जाये
ये चंचल मन मेरा
रहे साफ, न हो धुँधला
मन का दर्पण मेरा
हर शय में तुझे देखूँ
मेरे देव यही वर दो
हे नाथ !!! दयालु हो
मरता हूँ, जीता हूँ
जी कर, फिर मरता हूँ
नौ मास गर्भ की जेल
जाने से मैं डरता हूँ
बन्धन से छूट जाऊँ
कुछ और नजर कर दो
हे नाथ !!! दयालु हो
हो जाऊँ अलग जग के
शोक और संतापों से
“कर्मठ” ले बचा मुझको
दुर्गुण और पापों से
गाऊँ मैं गीत हर दम
तेरे ही, मधुर स्वर दो
हे नाथ !!! दयालु हो
बस इतनी दया कर दो
आया मैं शरण तेरी
भक्ति के भाव भर दो
हे नाथ !!! दयालु हो
हे नाथ !!! दयालु हो










