क्षण भंगुर जीवन की कलिका।
क्षण भंगुर जीवन की कलिका।
कल प्रातः को जाने, खिली न खिली।।
मलयाचल की शुचि शीतल,
मन्द सुगन्ध समीर, चली न चली।।
कर काल कुठार लिए फिरता,
तन नम्र से चोट, झिली न झिली ।।
जपले प्रभु नाम अरी रसना,
फिर अन्त समय में, हिली न हिली।
क्षण भंगुर जीवन की कलिका।
क्षण भंगुर जीवन की कलिका।
कल प्रातः को जाने, खिली न खिली।।
मलयाचल की शुचि शीतल,
मन्द सुगन्ध समीर, चली न चली।।
कर काल कुठार लिए फिरता,
तन नम्र से चोट, झिली न झिली ।।
जपले प्रभु नाम अरी रसना,
फिर अन्त समय में, हिली न हिली।
ईश्वर तुम्हीं दया करो, तुम बिन हमारा कौन है।
हे प्रभु हम तुमसे वर पावे
आर्यों की सन्तान,डरना क्या जानें ।
करले यतन हजार,पंछी उड़ जाना।
एक डाल के हम हैं पंछी
विश्वासों के दीप जलाकर युग ने तुम्हें पुकारा।
तुम इतने महान् बन आए।
हे प्यारे प्रभुजी ! सुन लो पुकार
जो सुन्दर सुरभित सुमन रहित
जिसके मन में बसी बुराई
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