ये नरतन जो तुमको मिला है

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ये नरतन जो तुमको मिला है

ये नरतन जो तुमको मिला है,
यह गंवाने के काबिल नहीं।
तेरा हर श्वास अनमोल हीरा,
यह लुटाने के काबिल नहीं है।।

पशु जीते जी सेवा कमाये,
बाद मरने के भी काम आये।
पर तेरा जिस्म मरकर किसी के,
काम आने के काबिल नहीं है।।

तू कुकर्मों में रत है ऐसा,
खर्च करता उसी पर है पैसा।
मिले बिन मोल अनमोल सत्संग,
छोड़ देने के काबिल नहीं हैं।।

जो न समझा तो रोना पड़ेगा,
नरक में गरक होना पड़ेगा।
तेरा होगा बुरा हाल ऐसा,
जो बताने के काबिल नहीं हैं।।

संसार में अग्नि के पहले आविष्कारक – महर्षि अथर्वन थे।