ईश महिमा
तेरी दया से हे प्रभु, कौन सी शै मिली नहीं।
झोली ही मेरी तंग है, तेरे यहाँ कमी नहीं।।
जीने को जी रहा हूँ मैं, मालिक तेरे बगैर भी।
जिन्दगी जिस को कह सकूँ, ऐसी तो जिन्दगी नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु…………
कब से पुकारता है दिल, सुनता मगर कोई नहीं।
मेरा तो इस जहान में, तेरे सिवा कोई नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु…………..
माना कि मैं गरीब हूँ, माना कि मैं फकीर हूँ।
मुझसे ना ऐसे रूठिये, कि जैसे मेरा कोई नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु…………
सजदा करूँ किसको बता, जब तू ही सामने नहीं।
कायले बन्दगी तो हूँ, काबिले बन्दगी नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु………..
गम पे गम उठाए जा, तीरों पे तीर खाए जा।
उफ न कर लबों को सी, आशिकी है दिल्लगी नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु…………
इसकी नजर मिली तो क्या, उसकी नजर फिरी तो क्या।
जिस बन्दगी में होश हो, वो बन्दगी बन्दगी नहीं।।
तेरी दया से है प्रभु………….










