तन मन से रहें हम स्वस्थ-स्वस्थ….
तन मन से रहें हम स्वस्थ-स्वस्थ….
दौड़ें हम नित दिन कोश-कोश।
पत्थर से बनें तन ठोस-ठोस ।।
यही हो अपना घोष-२।
व्यायाम जरूरी सख्त-सख्त….।।१।।
प्रातः-प्रातः हर शाम-शाम।
नगरी नगरी व ग्राम-ग्राम।।
बाहे छाया हो या घाम-घाम।
व्यायाम जरूरी वक्त-वक्त…।।२।।
रखते थे क्यों दादा परदादा।
चिन्तन ऊँचा जीवन भी सादा ।।
जीते थे सौ-सौ साल-साल।
नहीं छू पाता था अकाल-काल ।।
पर क्या है अपना हाल-हाल।
नित रोग से तन है ग्रस्त-ग्रस्त ।।३।।
छोड़ दिया क्यों घी दूध दही को।
पौष्टिक फल-फूल कन्द सभी को ।।
पीकर मदिरा और चाय-चाय।
करता रहता है हाय-हाय।।
नहीं मानें सच्ची राय-राय।
सब चाल-चलन है भ्रष्ट-भ्रष्ट..।।४।।










