आर्य समाज भजन
शराब की नदियाँ
चार मुक्तक (रुबाईयाँ)
१. हालत हमारे देश की जिसने ख़राब की।ऐसी ख़राब की है कि बस बेहिसाब की।बहती थीं...
मन का दीया
(तर्ज-या ख़ुदा सोई किस्मत जगा दे)
ज़िन्दगी का सफ़र करने वाले ।अपने मन का दीया तो जला ले।
१. वक्त...
कमाई देख ले
(तर्ज-कैसे कैसे यह जलवे दिखाए रामजी)
तूने कर ली है कितनी कमाई देख ले।हुआ फ़ायदा या घाटा ओ भाई...
इक दीया जलता हुआ लाखों जलाएगा।
(तर्ज-या मेरी मन्जिल बता या ज़िन्दगी को छीन ले)
इक दीया जलता हुआ लाखों जलाएगा।पर बुझे...
हीरा जीवन है अनमोल
(तर्ज-तेरे पूजन को भगवान बना मन मन्दिर आलीशान)
हीरा जीवन है अनमोल इसे यों मिट्टी में न...
दुनियाँ की हालत
(तर्ज-मयखाना तो छूट गया दर छूटे न मयख़ाने का)
क्या कहूँ दुनियाँ की हालत लग गई बीमारी है।उड़ चली...
सब खा गये मिर्च मसाला
(तर्ज-ओम् का झण्डा आया)
अजगर बन कर लाला। सब खा गये मिर्च मसाला।कर गड़बड़ घोटाला। सब खा...
कर ओम् नाम का जाप
(तर्ज- बुरा जो देखन मैं चला)
१. कर्मशील इनसान कर ओम् नाम का जाप।ओम् नाम के जाप...
जिसकी तलाश है
(तर्ज-तुझे क्या सुनाऊँ ऐ दिलरुबा…)
तुझे मनवा जिसकी तलाश है।अति निकट उसका निवास है।काहे दर बदर तू भटक रहावह...
नेकियाँ कमाना
(तर्ज - दिल का खिलौना हाये टूट गया)
नेकियाँ कमाना काहे छोड़ दिया।बुरी आदतों से नाता जोड़ दिया।नेकियाँ कमाना काहे………..
१....
सारा जीवन बीत गया
(तर्ज - मेरी छम छम बाजे पायलिया)
तेरा जीवन सारा बीत गया।तुम से मनाया नहीं मीत गया।तेरा जीवन...
अमृत पिया करो
(तर्ज - जोगी हम तो लुट गये तेरे प्यार में)
लिया करो उस प्रभु का नाम हर दम लिया...











