सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान् भुलाना ठीक नहीं।

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सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान् भुलाना ठीक नहीं।

सुख के अभिलाषी प्राणी को,
भगवान् भुलाना ठीक नहीं।
सीधे पथ जाने वाले को,
उलटे पथ जाना ठीक नहीं।।

सम्भव है मानव भूल करे,
इसका फल संकट भोग मिले।
परिणाम मिले जब करनी का,
तो फिर घबराना ठीक नहीं।
सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान…….

माना कि घड़ियां आती है,
उत्थान पतन की जीवन में।
उत्थान पतन की घड़ियों में,
कोई भेद जताना ठीक नहीं।।
सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान…..

आदेश यही समदर्शी का,
हर काल में जीवन समा रखना।
स्वामी के सच्चे सेवक को,
आज्ञा ठुकराना ठीक नहीं।।
सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान……

सुख चाहते हो यदि ‘देश’ सभी तो
बात खरी एक कहते हैं।
रोते आये इस दुनियाँ में,
रोते अब जाना ठीक नहीं।।
सुख के अभिलाषी प्राणी को, भगवान…….