सोचा ना कभी तूने संसार से जाना है।
सोचा ना कभी तूने
संसार से जाना है।
संसार से जाना है
कब लौट के आना है।
अम्बर को छू रहे हैं
ऊँचे मकान तेरे।
माना कि उड़ रहे हैं
नभ में विमान तेरे।
ये चन्द दिनों का तेरा
सब ठाठ सुहाना है…..
जाएगा यहाँ से जब
संगी न सखा होगा।
दौलत न साथ जाए
पैसा न टका होगा।
दो गज कफन का टुकड़ा
जिसमें मुंह छिपाना है….।
दो दिन की जिन्दगी है
दो दिन के खेल तेरे।
दो दिन के रिश्ते नाते
दो दिन के मेल तेरे।
कारवां न जिन्दगी का
इतना सा फंसाना है…..।










